शनिवार, 2 मई 2026

कक्षा 8 – हिंदी विषय – अवकाश कालीन गृहकार्य*

 *कक्षा 8 – हिंदी विषय – अवकाश कालीन गृहकार्य*  

*स्तर*: उच्च स्तरीय – तर्क, विश्लेषण, सृजन और जीवन-मूल्यों का समावेश  

*निर्देश*: प्रत्येक प्रश्न 150-180 शब्दों में। मौलिकता अनिवार्य। चित्र, नारा, कविता, तालिका आदि से उत्तर समृद्ध कीजिए।


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### *5 दीर्घ उत्तरीय प्रश्न – उच्च स्तरीय – 10 अंक प्रत्येक*


#### *1. व्यंग्य-लेखन + सामाजिक अनुप्रयोग – ‘मोबाइल बना तीसरा हाथ’*  

*प्रश्न*: कल्पना कीजिए कि वर्ष 2050 में हर मनुष्य के तीन हाथ हैं – तीसरा हाथ ‘मोबाइल’ है। इस स्थिति पर एक व्यंग्यात्मक लेख लिखिए। बताइए कि रिश्तों, पढ़ाई, खेल और स्वास्थ्य पर इसका क्या असर पड़ा? लेख के अंत में ‘मोबाइल-संयम’ पर एक नारा भी दीजिए।  

*कौशल*: कल्पना + व्यंग्य + सामाजिक चिंतन। *अनुप्रयोग*: निबंध व नारा-लेखन, तकनीक का विवेकपूर्ण प्रयोग।


#### *2. रिपोर्ट + अनुभव – ‘मैं बना एक दिन का रिपोर्टर’*  

*प्रश्न*: आप एक दिन के लिए अपने शहर के ‘बाल-रिपोर्टर’ बन गए। बाजार, अस्पताल या रेलवे स्टेशन – किसी एक स्थान पर जाकर वहाँ की सफाई, भीड़, सुविधा-असुविधा पर रिपोर्ट तैयार कीजिए। अपनी रिपोर्ट में 5 लोगों से बातचीत के अंश, 3 समस्याएँ और 3 व्यावहारिक समाधान भी लिखिए। रिपोर्ट को समाचार की शैली में लिखिए।  

*कौशल*: अवलोकन + साक्षात्कार + समस्या-समाधान। *अनुप्रयोग*: रिपोर्ट-लेखन, नागरिक बोध।


#### *3. डायरी + आत्म-विश्लेषण – ‘जब मेरी अंतरात्मा ने मुझे टोका’*  

*प्रश्न*: छुट्टियों में हुई ऐसी एक घटना लिखिए जब आपसे कोई गलती हुई और आपकी अंतरात्मा ने आपको टोका। घटना क्या थी? आपने पहले क्या सोचा, फिर क्या किया? उस अनुभव से आपको कौन-सा जीवन-मूल्य सीखने को मिला? इसे डायरी-प्रविष्टि की शैली में 2 दिन की तिथि डालकर लिखिए।  

*कौशल*: आत्म-विश्लेषण + नैतिक मूल्य + अनुभव। *अनुप्रयोग*: डायरी-लेखन, चरित्र-निर्माण।


#### *4. संवाद + विज्ञान-कथा – ‘2075 से आया मेहमान’*  

*प्रश्न*: कल्पना कीजिए वर्ष 2075 से एक बाल-वैज्ञानिक टाइम-मशीन से आपके घर आया है। वह 2026 की दुनिया देखकर हैरान है। आपके और उसके बीच 12-15 पंक्तियों का संवाद लिखिए। संवाद में वह भविष्य की 3 तकनीकें बताए और आप वर्तमान की 3 समस्याएँ बताकर उससे समाधान पूछें। संवाद का एक रोचक शीर्षक भी दीजिए।  

*कौशल*: वैज्ञानिक कल्पना + तर्क + संवाद। *अनुप्रयोग*: संवाद-लेखन, भविष्य-दृष्टि।


#### *5. काव्य-सृजन + व्याकरण अनुप्रयोग – ‘विशेषणों से सजी मेरी माँ’*  

*प्रश्न*: ‘माँ’ विषय पर 12 पंक्तियों की एक स्वरचित कविता लिखिए। शर्त: कविता में कम-से-कम 8 गुणवाचक विशेषण, 2 संख्यावाचक विशेषण और 2 परिमाणवाचक विशेषण होने चाहिए। कविता के बाद सभी विशेषणों की तालिका बनाइए – विशेषण, भेद, विशेष्य। कविता को एक बॉर्डर से सजाइए।  

*कौशल*: काव्य-सृजन + व्याकरण का अनुप्रयोग + भाव-प्रवणता। *अनुप्रयोग*: विशेषण, कविता-लेखन।


--- इस कार्य को हिंदी की नोटबुक में लिखिए।

कक्षा 7 – हिंदी विषय – अवकाश कालीन गृहकार्य*

 *कक्षा 7 – हिंदी विषय – अवकाश कालीन गृहकार्य*  

*उद्देश्य*: रचनात्मकता, कल्पनाशीलता, निजी अनुभव और भाषा का व्यावहारिक अनुप्रयोग  

*निर्देश*: प्रत्येक प्रश्न 120-150 शब्दों में लिखिए। उत्तर को चित्र, संवाद, डायरी-प्रविष्टि, विज्ञापन आदि से सजाइए। शुद्ध वर्तनी और विराम-चिह्न का ध्यान रखें।


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### *5 दीर्घ उत्तरीय प्रश्न – 10 अंक प्रत्येक*


#### *1. आत्मकथा लेखन – ‘मैं हूँ एक पुरानी साइकिल’*  

*प्रश्न*: कल्पना कीजिए कि आप एक 10 साल पुरानी साइकिल हैं। अपने जन्म से लेकर आज तक की यात्रा अपनी जुबानी लिखिए। आपको किसने खरीदा, आपने किन-किन रास्तों पर सफर किया, अब आपकी हालत कैसी है? अंत में बच्चों को क्या संदेश देना चाहेंगी?  

*कौशल*: कल्पनाशक्ति + मानवीकरण अलंकार + वस्तुओं के प्रति संवेदना। *अनुप्रयोग*: आत्मकथा विधा।


#### *2. अनुभव आधारित लेख – ‘जब मैंने पहली बार कुछ नया सीखा’*  

*प्रश्न*: इन छुट्टियों में आपने दादी-नानी, माता-पिता या किसी बुजुर्ग से कोई नया काम सीखा – जैसे अचार बनाना, पतंग बनाना, बागवानी, सिलाई आदि। उस अनुभव को ‘सीखने की डायरी’ के रूप में लिखिए। क्या कठिन लगा? किसने मदद की? सीखकर कैसा लगा?  

*कौशल*: निजी अनुभव + क्रमबद्ध वर्णन + भाववाचक संज्ञा। *अनुप्रयोग*: डायरी-लेखन।


#### *3. विज्ञापन + संवाद – ‘मेरे मोहल्ले का सुपरहीरो’*  

*प्रश्न*: आपके मोहल्ले/गाँव में कोई व्यक्ति है जो बिना बताए सबकी मदद करता है – जैसे सफाईकर्मी, दूधवाला, गार्ड, डाकिया। उसे ‘मोहल्ले का सुपरहीरो’ मानकर एक आकर्षक विज्ञापन तैयार कीजिए। साथ में आप और उस सुपरहीरो के बीच 8-10 पंक्तियों का काल्पनिक संवाद भी लिखिए।  

*कौशल*: रचनात्मकता + विज्ञापन की भाषा + संवाद-लेखन। *अनुप्रयोग*: व्यावहारिक हिंदी।


#### *4. पत्र + समस्या समाधान – ‘कलेक्टर महोदय को पत्र’*  

*प्रश्न*: आपके शहर के पार्क में झूले टूटे हैं, कूड़ा फैला है और पेड़ सूख रहे हैं। कलेक्टर को औपचारिक पत्र लिखकर समस्या बताइए और 3 सुझाव भी दीजिए कि पार्क को सुंदर कैसे बनाया जाए। पत्र में अपने सुझावों को बुलेट में लिखिए।  

*कौशल*: औपचारिक पत्र + समस्या-अनुप्रयोग + सुझाव कौशल। *अनुप्रयोग*: नागरिक जागरूकता।


#### *5. कहानी में व्याकरण – ‘विशेषणों का मेला’*  

*प्रश्न*: एक ऐसी कहानी लिखिए जिसके हर वाक्य में कम-से-कम एक विशेषण हो। कहानी का विषय: ‘मेले में खोया बस्ता’। कहानी के अंत में उन सभी 10 विशेषणों को रेखांकित करके अलग लिखिए और बताइए वे किसकी विशेषता बता रहे हैं। कहानी का एक सीन भी बनाइए।  

*कौशल*: कल्पना + विशेषण की पहचान + रचनात्मक लेखन। *अनुप्रयोग*: व्याकरण को कहानी में उतारना।

कक्षा 6 – हिंदी विषय – अवकाश कालीन गृहकार्य*

 *कक्षा 6 – हिंदी विषय – अवकाश कालीन गृहकार्य*  

*उद्देश्य*: रचनात्मकता, कल्पनाशक्ति, निजी अनुभव और हिंदी भाषा-कौशल का विकास  

*निर्देश*: प्रत्येक प्रश्न का उत्तर 100-120 शब्दों में लिखिए। चित्र, रंग, सजावट से उत्तर को आकर्षक बनाइए।


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### *5 दीर्घ उत्तरीय प्रश्न*


#### *1. कल्पना की उड़ान – ‘अगर मैं एक पेड़ होता’*  

*प्रश्न*: कल्पना कीजिए कि आप एक पेड़ बन गए हैं। आप कहाँ खड़े हैं? आपको कौन-कौन मिलता है? गर्मी, बारिश, सर्दी में आपका अनुभव कैसा रहता है? पेड़ बनकर आप मनुष्यों को क्या संदेश देना चाहेंगे?  

*भाषा-कौशल*: संज्ञा, विशेषण, पर्यायवाची का प्रयोग। कल्पनाशक्ति + पर्यावरण जागरूकता।


#### *2. मेरा अवकाश, मेरा अनुभव – ‘छुट्टियों की सबसे मीठी याद’*  

*प्रश्न*: इन गर्मी की छुट्टियों में आपके साथ घटी एक ऐसी घटना लिखिए जिसे आप कभी नहीं भूलेंगे। उस दिन क्या खास हुआ था? आपको कैसा लगा? उस अनुभव से आपने क्या सीखा?  

*भाषा-कौशल*: अनुच्छेद लेखन, भाववाचक संज्ञा, विराम-चिह्न। निजी अनुभव + अभिव्यक्ति।


#### *3. पत्र-लेखन में रचनात्मकता – ‘चाँद को पत्र’*  

*प्रश्न*: कल्पना कीजिए कि चाँद आपका दोस्त है। उसे एक पत्र लिखिए। पत्र में बताइए कि आप रात में उसे देखकर क्या सोचते हैं। उससे कोई तीन सवाल भी पूछिए। पत्र का प्रारूप सही रखिए।  

*भाषा-कौशल*: अनौपचारिक पत्र, संबोधन, प्रश्नवाचक वाक्य। कल्पना + पत्र-लेखन।


#### *4. चित्र देखो, कहानी बुनो*  

*प्रश्न*: नीचे दिए विषयों में से किसी एक पर आधारित कहानी लिखिए और उसका एक चित्र भी बनाइए:  

   *(क)* एक बूढ़ा बरगद और छोटी चिड़िया की दोस्ती  

   *(ख)* स्कूल बैग ने की छुट्टी की सैर  

   *(ग)* बारिश की पहली बूँद की आत्मकथा  

कहानी में संवाद भी लिखिए और उसे एक उचित शीर्षक दीजिए।  

*भाषा-कौशल*: कहानी-तत्व, संवाद-लेखन, शीर्षक। रचनात्मकता + कला एकीकरण।


#### *5. शब्दों का खेल – ‘मेरी नई शब्द-डायरी’*  

*प्रश्न*: छुट्टियों में आपने जो 10 नए हिंदी शब्द सीखे, उनकी एक ‘शब्द-डायरी’ बनाइए। प्रत्येक शब्द का अर्थ, वाक्य-प्रयोग और उससे मिलता-जुलता एक चित्र बनाइए। अंत में बताइए कि इनमें से आपको सबसे सुंदर शब्द कौन-सा लगा और क्यों?  

*भाषा-कौशल*: शब्द-भंडार, वाक्य-रचना, अर्थग्रहण। अनुभव + भाषा समृद्धि।


हिंदी की नोटबुक में लिखिए।

सोमवार, 13 अप्रैल 2026

ज्ञानकर्मी कुलपति : डा जनार्दन वाघमारे

ज्ञानकर्मी कुलपति : डा जनार्दन वाघमारे 

केवल ज्ञान के बल पर सभी उच्च पदों पर पहुँचने वाले, अखंड रूप से ज्ञानयज्ञ चलाने वाले ज्ञानर्षि डॉ. जनार्दन वाघमारे सर थे। वे केवल पदों से बड़े नहीं थे, बल्कि उनकी वैचारिक ऊंचाई भी थी। उन्होंने आयुष्यभर ज्ञान, प्रामाणिकता और समाजप्रेम का ध्यास लिया। शिक्षा क्षेत्र में उन्होंने जो कार्य किया है, वह अमूल्य है। नवनिर्मित स्वामी रामानंद तीर्थ मराठवाड़ा विश्वविद्यालय के वे संस्थापक कुलपति थे। वे कुलपति थे, उस समय मैं इस विश्वविद्यालय का विद्यार्थी था। इस विश्वविद्यालय ने हमें बनाया। सर ने इस विश्वविद्यालय को भारतभर में नाम दिलाया। उन्होंने अपने पद का उपयोग दलित, वंचित, दुर्बल, दुर्लक्षित घटकों के लिए किया। कई नए प्रयोग किए। वे लातूर के नगराध्यक्ष बने। बाद में वे राज्यसभा में भी गए। वहाँ भी अपनी अध्ययनपूर्ण मांडणी से उन्होंने राज्यसभा को गाजाया। मराठी, हिंदी और अंग्रेजी इन तीनों भाषाओं पर उनका प्रभुत्व था। वे राज्यपाल बनने की भी संभावना थी। उनकी अत्यंत ओघवती, शांत अध्ययनपूर्ण व्याख्यान सुनने का एक भी अवसर मैंने और मेरे सहपाठियों ने नहीं छोड़ा। वह समय इंजीनियरिंग कॉलेज के प्राध्यापकों को कुलपति नियुक्त करने का नहीं था। कुलपति क्या होता है, इस पद का आब कैसे रखना है, इसकी जाणीव रखने वाला वह समय था। विश्वविद्यालय अपने जाति के या संगठन के लोगों के लिए कुरण समझने के समय में उनका निधन होना बड़ी हानि है। विश्वविद्यालय के पहले कुलपति के रूप में उन्होंने केवल प्रशासनिक जिम्मेदारी नहीं निभाई, बल्कि विश्वविद्यालय को मूल्याधिष्ठित शिक्षा की दिशा दी। शिक्षा केवल पदवी प्राप्त करने का साधन नहीं, बल्कि जीवन घड़ने की प्रक्रिया है, इस पर उनका ठाम विश्वास था। लातूर के नगराध्यक्ष के रूप में कार्य करते समय उन्होंने शहर विकास के साथ ही संस्कार और सामाजिक बांधिलकी पर जोर दिया। प्रशासन में पारदर्शिता, निर्णय में धैर्य और लोगों के प्रति आत्मीयता उनकी कार्यशैली की विशेषताएँ थीं। उनके जीवन का एक प्रेरणादायक प्रसंग है जीवन कैसे जीना है, इसकी खोज। वडवळ नामक इस बेट पर पुस्तकें और दशम्या लेकर छह मित्रों ने तीन दिन चिंतन-चर्चा की। सुखी जीवन का मूलमंत्र खोजने का यह प्रयास उनके विचारशील वृत्ति का प्रतीक है। केवल अपने लिए नहीं, बल्कि समाज के लिए आदर्श जीवन कैसे घड़ाना है, इसके लिए उन्होंने आयुष्य व्यतीत किया। आज उन छह मित्रों में से 'शेवटचे पान गळून पडले', यह जाणीव मन हेलावून टाकने वाली है। वे बताते हैं, 'उन तीन दिनों में सभी ने अपने को क्या बनाना है, किसका आदर्श सामने रखना है, यह लिखकर चिट्ठियाँ टाकीं। दिगंबरराव होळीकर ने एक एक चिट्ठी उठाकर उसे पढ़कर सुनाया। दिगंबरराव होळीकर ने योगीराज श्रीकृष्ण का आदर्श रखा था। उनके ऊपर गीता का प्रभाव था। वे कर्मयोगी बनना चाहते थे। निवृत्तीराव होळीकर ने स्वामी श्रद्धानंद का आदर्श रखा था। वे आर्यसमाज और देश की निरंतर सेवा करना चाहते थे। रामप्रसाद बाहेती ज्ञानेश्वरी के भक्त थे। उन्हें भक्तियोग पसंद था। ज्ञानेश्वर का आदर्श उन्होंने रखा था। नागनाथराव सूर्यवंशी ने न्याय महादेव गोविंद रानडे का आदर्श रखा था। न्याय रानडे के विचार उन्हें आत्मसात करने थे। गणपतराव बाजूळगे प्रसिद्ध चित्रकार बनना चाहते थे। चित्रकला का उन्हें बचपन से ही छंद था। जनार्दन वाघमारे ने मर्यादापुरुषोत्तम राम का आदर्श रखा था। वे सत्यवचनी और न्यायी बनना चाहते थे। हम सभी अपने समाज और देश की निःस्वार्थ सेवा करना चाहते थे। जातिव्यवस्था के कारण इस देश की प्रचंड हानि हुई है, इसलिए हम अंतरजातीय विवाह के माध्यम से जातिव्यवस्था को छेद देना चाहते थे। सभी ने व्यसनाधीनता से दूर रहने का निश्चय किया था। तीन दिनों की चर्चा में हमने अपने को क्या करना है, इसका गहराई से विचार किया। दिगंबरराव होळीकर ने इन चिट्ठियों को पढ़कर सुनाने के बाद सभी ने अपना मनोगत व्यक्त किया और प्रतिज्ञा ली।' यह डॉ. वाघमारे सर ने 'देवमाणूस' पुस्तक प्रकाशन समारोह में बताया था। यह दशकपूर्ति अंक में भी लिखा गया है। तुकाराम बिरादार लिखित 'देव तेथेचि जाणावा' नामक होळकर सर के चरित्र को लिखी गई प्रस्तावना में भी इसका उल्लेख है। होळकर सर के कहने पर गाववालों ने अपने परंपरागत आख्यान का त्याग करके केवल होळकर यह आख्यान धारण किया था। इस कारण डॉ. वाघमारे सर पर होळकर सर का प्रचंड प्रभाव था। 'एक नगराध्यक्ष का चिंतन' इस ग्रंथ में उन्होंने शिक्षा क्षेत्र में जैसे लातूर पैटर्न निर्माण हुआ, वैसे ही राजनीति में गुणवत्ता कैसे लाई जाए, इस दृष्टि से चिंतन मांडा। वे नगराध्यक्ष बनना प्लेटो के आदर्श राज्य संकल्पना के प्रत्यक्ष तत्त्वज्ञ राजा का अनुभव करना था। अन्यथा आज के समय में तत्त्वज्ञ व्यक्ति चुनाव प्रक्रिया से चुने जाने की कल्पना भी नहीं की जा सकती। लेकिन लातूर का मतदाता तसा मतभान रखने वाला है, इसलिए वे सीधे जनता से चुनकर आए और नगराध्यक्ष बने। मराठवाड़ा में विचारक साहित्यकार प्राचार्य डॉ. नरहर कुरुंदकर, प्राचार्य डॉ. सुरेंद्र बारलिंगे, प्राचार्य डॉ. हेमचंद्र धर्माधिकारी, प्राचार्य गोविंद गोपछडे और उदगीर के प्राचार्य डॉ. ना. य. डोळे भी प्रचंड विद्वान विचारक लेखक तत्त्वज्ञ साहित्यकार लोकशिक्षक थे, लेकिन उन्हें डॉ. जनार्दन वाघमारे सर जैसा शिक्षा और राजनीति का संतुलन साधना नहीं आया। नामांतर आंदोलन के बाद वे स्वामी रामानंद तीर्थ मराठवाड़ा विश्वविद्यालय नांदेड़ के संस्थापक कुलपति बने। 'मूठभर माती' उनका आत्मचरित्र उनके जीवनप्रवास का प्रामाणिक चित्रण है। उसमें कई पृष्ठों पर होळकर सर का उल्लेख आता है। इस पुस्तक से उनके संघर्ष की, मूल्यनिष्ठता की और आत्मपरीक्षण की झलक मिलती है। उन्होंने अपने यशापयश को प्रांजलता से देखा और समाज के सामने आदर्श रखा। डॉ. जनार्दन वाघमारे का व्यक्तित्व बहुआयामी था। वे अध्ययनशील थे, लेखक थे, संघटक थे और सबसे महत्वपूर्ण यह कि संवेदनशील मानव थे। उन्होंने आयुष्यभर विचारों की मशाल जलाए रखी। समाज में विषमता, अज्ञान और अन्याय के खिलाफ उन्होंने लेखनी और कृती का उपयोग किया। उनके जाने से आज एक विचारधारा रुक गई, ऐसा लगता है, लेकिन उन्होंने दिए विचार, उन्होंने घड़े विद्यार्थी और उन्होंने लिखी पुस्तकें ही उनकी असली स्मृति है। 'माणूस जाता है, लेकिन विचार अमर रहते हैं', यह उनके जीवन ने सिद्ध किया। होळकर सर के अंतिम संस्कार के समय वे बोले थे, 'जीवन का आखिरी टप्पा खत्म होने पर मृत्यु का क्षण आता है। हमें जीवन भी समझना चाहिए और मृत्यु भी समझना चाहिए। जीवन समझना आसान है, लेकिन मृत्यु समझने में देर लगती है। आखिर जीवन और मृत्यु एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। जो कर्मयोग का जीवन जीता है, उसके लिए जीवन और मृत्यु दोनों ही वरदान हैं।' हमारा यह आधारवड हमें छोड़कर चला गया, इसका मनस्वी दुःख है।

     मूल लेखक - प्रा.डा. दत्ताहरी होनराव

      अनुवाद - डी. बी. देवकत्ते 

Class 6 मातृभूमि' पाठ के मुख्य शब्दार्थ:

 मातृभूमि' पाठ के मुख्य शब्दार्थ:

सोमवार, 2 फ़रवरी 2026

विकसित भारत: एक सपना और एक लक्ष्य*

*विकसित भारत: एक सपना और एक लक्ष्य*


भारत एक प्राचीन और समृद्ध देश है, जिसने सदियों से ज्ञान, संस्कृति, और विज्ञान के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। आज, भारत एक तेजी से विकसित हो रहा देश है, जो अपने नागरिकों के लिए बेहतर जीवन स्तर और अवसर प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है।


*विकसित भारत का अर्थ*


विकसित भारत का अर्थ है एक ऐसा देश जहां सभी नागरिकों को मूलभूत सुविधाएं जैसे कि शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वच्छता, और सुरक्षा प्राप्त हों। जहां आर्थिक विकास और सामाजिक न्याय के माध्यम से सभी को समान अवसर मिले। जहां प्रौद्योगिकी और नवाचार का उपयोग करके देश की समस्याओं का समाधान किया जाए।


*विकसित भारत के लक्ष्य*


- *शिक्षा*: सभी को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करना।

- *स्वास्थ्य*: सभी को समुचित स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करना।

- *स्वच्छता*: सभी को स्वच्छ वातावरण और स्वच्छता प्रदान करना।

- *सुरक्षा*: सभी को सुरक्षा और न्याय प्रदान करना।

- *आर्थिक विकास*: देश की आर्थिक विकास दर को बढ़ाना।

- *नवाचार*: प्रौद्योगिकी और नवाचार को बढ़ावा देना।


*विकसित भारत के लिए कदम*


- *शिक्षा में सुधार*: शिक्षा प्रणाली में सुधार करना और सभी को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करना।

- *स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार*: स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार करना और सभी को समुचित स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करना।

- *स्वच्छता अभियान*: स्वच्छता अभियान को बढ़ावा देना और सभी को स्वच्छ वातावरण प्रदान करना।

- *सुरक्षा में सुधार*: सुरक्षा में सुधार करना और सभी को सुरक्षा प्रदान करना।

- *आर्थिक विकास*: आर्थिक विकास को बढ़ावा देना और सभी को रोजगार के अवसर प्रदान करना।

- *नवाचार को बढ़ावा*: नवाचार को बढ़ावा देना और प्रौद्योगिकी का उपयोग करके देश की समस्याओं का समाधान करना।


*निष्कर्ष*


विकसित भारत एक सपना है, जिसे हम सभी मिलकर पूरा कर सकते हैं। हमें शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वच्छता, सुरक्षा, आर्थिक विकास, और नवाचार के क्षेत्र में सुधार करना होगा। हमें एक साथ मिलकर काम करना होगा और देश को विकसित बनाने के लिए प्रतिबद्ध होना होगा।

*राष्ट्र एवं समाज के विकास में मेरा योगदान*

 *राष्ट्र एवं समाज के विकास में मेरा योगदान*


मैं एक सामान्य नागरिक के रूप में राष्ट्र एवं समाज के विकास में अपना योगदान देने के लिए प्रतिबद्ध हूँ। मेरा मानना है कि प्रत्येक व्यक्ति का छोटा सा योगदान भी समाज और राष्ट्र के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।


*शिक्षा और जागरूकता*


मैं अपने आसपास के लोगों को शिक्षा के महत्व के बारे में जागरूक करने का प्रयास करता हूँ। मैं लोगों को शिक्षा के महत्व को समझाने के लिए विभिन्न कार्यक्रमों और अभियानों में भाग लेता हूँ। मैं अपने ज्ञान और अनुभव को दूसरों के साथ साझा करने का प्रयास करता हूँ ताकि वे भी शिक्षित हो सकें और अपने जीवन में आगे बढ़ सकें।


*स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण*


मैं स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण के लिए काम करता हूँ। मैं लोगों को स्वच्छता के महत्व के बारे में जागरूक करता हूँ और उन्हें स्वच्छता बनाए रखने के लिए प्रेरित करता हूँ। मैं पर्यावरण संरक्षण के लिए भी काम करता हूँ और लोगों को पेड़ लगाने और पर्यावरण को स्वच्छ रखने के लिए प्रेरित करता हूँ।


*समाज सेवा*


मैं समाज सेवा के लिए भी काम करता हूँ। मैं विभिन्न सामाजिक संगठनों के साथ मिलकर काम करता हूँ और समाज के वंचित वर्गों की मदद करने का प्रयास करता हूँ। मैं लोगों को सामाजिक मुद्दों के बारे में जागरूक करता हूँ और उन्हें सामाजिक परिवर्तन के लिए प्रेरित करता हूँ।


*निष्कर्ष*


मैं मानता हूँ कि राष्ट्र एवं समाज के विकास में मेरा योगदान बहुत छोटा है, लेकिन मैं अपने प्रयासों को जारी रखूंगा। मैं लोगों को जागरूक करने, स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण के लिए काम करने, और समाज सेवा के लिए काम करने का प्रयास करता रहूंगा। मैं मानता हूँ कि यदि हम सभी मिलकर काम करें तो हम एक बेहतर समाज और राष्ट्र बना सकते हैं।

कक्षा 8 – हिंदी विषय – अवकाश कालीन गृहकार्य*

 *कक्षा 8 – हिंदी विषय – अवकाश कालीन गृहकार्य*   *स्तर*: उच्च स्तरीय – तर्क, विश्लेषण, सृजन और जीवन-मूल्यों का समावेश   *निर्देश*: प्रत्येक ...