मंगलवार, 15 सितंबर 2026

Class 10 अभ्यास प्रश्न

 

1. साना-साना हाथ जोड़ि (मधु कांकरिया)

  1. प्रश्न 1: गंतोक को 'मेहनतकश बादशाहों का शहर' क्यों कहा गया है?
  2. प्रश्न 2: जितेन नार्गे ने लेखिका को सिक्किम की प्रकृति, वहाँ की भौगोलिक स्थिति और जनजीवन के बारे में क्या-क्या जानकारी दी? अपने शब्दों में लिखिए।
  3. प्रश्न 3: पहाड़ी स्त्रियों के जीवन की कठोरता और संघर्ष का चित्रण पाठ में किस प्रकार किया गया है?

2. यह दंतुरित मुस्कान (नागाार्जुन)

  1. प्रश्न 1: बच्चे की 'दंतुरित मुस्कान' का कवि नागार्जुन के मन पर क्या प्रभाव पड़ता है?
  2. प्रश्न 2: "धूलि-धूसर तुम्हारे ये गात... छोड़कर तालाब मेरी झोपड़ी में खिल रहे जलजात।" इन पंक्तियों का भाव स्पष्ट कीजिए।
  3. प्रश्न 3: कवि ने बच्चे और उसकी माँ के संबंध को किस प्रकार चित्रित किया है?

3. फसल (नागाार्जुन)

  1. प्रश्न 1: कवि के अनुसार 'फसल' क्या है? इसे पैदा करने में किन-किन तत्वों का योगदान होता है?
  2. प्रश्न 2: "फसल हाथों के स्पर्श की गरिमा और महिमा है"—कवि ने ऐसा क्यों कहा है?
  3. प्रश्न 3: 'फसल' कविता के माध्यम से कवि प्रकृति और मनुष्य के संबंधों को किस रूप में व्यक्त करना चाहता है?

शुक्रवार, 11 सितंबर 2026

मित्रता पर अनुच्छेद

मित्रता

मित्रता जीवन का एक अनमोल और सुंदर उपहार है। यह एक ऐसा पवित्र रिश्ता है, जो खून के रिश्तों से परे दिल के जुड़ाव पर आधारित होता है। हम अपने रिश्तेदार खुद नहीं चुन सकते, लेकिन एक सच्चा दोस्त चुनना हमारे अपने हाथ में होता है। ​एक सच्चा मित्र जीवन के हर मोड़ पर ढाल बनकर खड़ा रहता है। वह न केवल हमारी खुशियों में शामिल होकर उन्हें दोगुना करता है, बल्कि विपत्ति और दुख के समय में हमारा सहारा बनकर सही मार्गदर्शन भी प्रदान करता है। मित्रता में ऊँच-नीच, जात-पात या अमीर-गरीब का कोई भेद नहीं होता; यह केवल निस्वार्थ प्रेम, विश्वास और आपसी सम्मान पर टिकी होती है। जिस प्रकार कबीर और रहीम के दोहों में सच्चे मित्र की पहचान संकट के समय बताई गई है, उसी प्रकार एक अच्छा दोस्त हमें सही रास्ते पर चलने की प्रेरणा देता है और हमारी गलतियों को सुधारने में मदद करता है। ​आज के भागदौड़ भरे जीवन में जहाँ स्वार्थ हावी होता जा रहा है, वहाँ एक सच्चा और निष्कपट मित्र मिलना किसी वरदान से कम नहीं है। इसलिए, हमें भी अपने दोस्तों के प्रति हमेशा ईमानदार, वफादार और मददगार रहना चाहिए ताकि मित्रता का यह बंधन जीवन भर अटूट बना रहे।

विशेषण

✍️ विशेषण — हस्तलिखित नोट्स 📌 विशेषण की परिभाषा जो शब्द संज्ञा या सर्वनाम की विशेषता बताते हैं, उन्हें विशेषण कहते हैं। उदाहरण: सुंदर फूल तीन लड़के थोड़ा पानी यह पुस्तक यहाँ सुंदर, तीन, थोड़ा और यह — विशेषण हैं। ⭐ विशेषण के मुख्य भेद 1. गुणवाचक विशेषण जो विशेषण गुण, दोष, रंग, आकार, दशा आदि बताते हैं। उदाहरण: सुंदर लड़की, काला घोड़ा, मीठा आम, लंबा पेड़ 2. संख्यावाचक विशेषण जो विशेषण संख्या या क्रम का बोध कराते हैं। उदाहरण: पाँच विद्यार्थी दो पुस्तकें पहला स्थान इसके प्रमुख प्रकार: निश्चित संख्यावाचक — पाँच लड़के अनिश्चित संख्यावाचक — कई लड़के क्रमवाचक — पहला स्थान 3. परिमाणवाचक विशेषण जो विशेषण मात्रा या परिमाण बताते हैं। उदाहरण: थोड़ा दूध अधिक पानी दो लीटर तेल 4. सार्वनामिक विशेषण जब सर्वनाम शब्द संज्ञा से पहले आकर उसकी विशेषता बताता है, तो उसे सार्वनामिक विशेषण कहते हैं। उदाहरण: यह लड़का होशियार है। वह पुस्तक मेरी है। कौन-सा प्रश्न कठिन है? 📝 पहचानने की आसान ट्रिक संज्ञा/सर्वनाम की विशेषता बताने वाला शब्द = विशेषण प्रश्न करके पहचानें: कैसा? कितना? कितने? कौन-सा? उदाहरण: लाल फूल खिला है। फूल कैसा है? → लाल → विशेषण।

Class 9 ऐसी भी बातें होती हैं - प्रश्न और उत्तर

 Class 9


ऐसी भी बातें होती हैं - प्रश्न और उत्तर (Notebook Format)

प्रश्न 1: लता जी ने अपने पिता (पं. दीनानाथ मंगेशकर) से क्या-क्या जीवन-मूल्य सीखे?

उत्तर:

लता जी ने अपने पिता से स्वाभिमान, सच्चाई, अनुशासन और लगन के साथ जीना सीखा। उनके पिता ने उन्हें सिखाया कि चाहे परिस्थितियाँ कैसी भी हों, मनुष्य को अपने आत्मसम्मान से समझौता नहीं करना चाहिए और हमेशा सत्य के मार्ग पर चलना चाहिए।

प्रश्न 2: पिताजी की असमय मृत्यु के बाद लता जी के सामने क्या चुनौतियाँ थीं और उन्होंने उनका सामना कैसे किया?

उत्तर:

पिताजी की मृत्यु के समय लता जी की आयु बहुत कम (केवल 13 वर्ष) थी। उन पर अपने पूरे परिवार (माँ और चार भाई-बहनों) के पालन-पोषण की ज़िम्मेदारी आ गई। उन्होंने बिना हार माने गायन और अभिनय के क्षेत्र में कड़ा संघर्ष किया तथा अपने आत्मसम्मान और लगन के बल पर परिवार को संभाला।

प्रश्न 3: संगीत साधना के संदर्भ में लता जी के क्या विचार थे?

उत्तर:

लता जी के अनुसार संगीत केवल एक व्यवसाय नहीं, बल्कि एक साधना और ईश्वर की भक्ति है। वे मानती थीं कि संगीत में निखार निरंतर अभ्यास (रियाज़), समर्पण और पूरी एकाग्रता से ही आता है।

प्रश्न 4: 'ऐसी भी बातें होती हैं' पाठ के आधार पर लता जी के व्यक्तित्व की मुख्य विशेषताएँ लिखिए।

उत्तर:

लता जी के व्यक्तित्व की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:

  1. स्वाभिमानी: वे कठिन से कठिन समय में भी अपने आत्मसम्मान से समझौता नहीं करती थीं।
  2. कर्तव्यनिष्ठ: कम उम्र में ही परिवार की पूरी ज़िम्मेदारी को सहर्ष स्वीकार किया।
  3. विनम्रता: अत्यधिक प्रसिद्धि और सफलता मिलने के बाद भी उनका व्यवहार अत्यंत सीधा और नम्र था।
  4. कठोर परिश्रमी: अपने गायन में पूर्णता लाने के लिए घंटों रियाज़ और अभ्यास करती थीं।

प्रश्न 5: इस पाठ से विद्यार्थियों को क्या सीख मिलती है?

उत्तर:

इस पाठ से हमें यह सीख मिलती है कि जीवन में आने वाली मुसीबतों और संकटों से घबराना नहीं चाहिए। ईमानदारी, लगन और स्वाभिमान के साथ निरंतर परिश्रम करने से कठिन से कठिन राह भी आसान हो जाती है।

Class 8 दो गौरैया - प्रश्न और उत्तर

 Class 8

दो गौरैया - प्रश्न और उत्तर (Notebook Format)

प्रश्न 1: घर में गौरैया के आ जाने पर परिवार के सदस्यों की पहली प्रतिक्रिया क्या थी?

उत्तर:

घर में गौरैया के आ जाने पर पिताजी और माँ परेशान हो गए। वे गौरैया द्वारा घर में तिनके और कचरा बिखेरने से चिंतित थे, इसलिए उन्होंने गौरैया को घर से बाहर निकालने का फैसला किया।

प्रश्न 2: पिताजी ने गौरैया को घर से भगाने के लिए क्या-क्या उपाय किए?

उत्तर:

पिताजी ने गौरैया को बाहर भगाने के लिए निम्नलिखित उपाय किए:

  1. ​घर के खिड़की-दरवाजे बंद कर दिए।
  2. ​लाठी/लाठीनुमा डंडे से उन्हें डराने का प्रयास किया।
  3. ​उनके द्वारा बनाए जा रहे घोंसले के तिनकों को हटा दिया।

प्रश्न 3: गौरैया को बाहर भगाने के सारे उपाय क्यों असफल हो गए?

उत्तर:

गौरैया बहुत जिद्दी और चतुर थीं। जब भी कोई दरवाजा या खिड़की थोड़ी सी भी खुलती, वे तुरंत अंदर आ जाती थीं। पिताजी द्वारा तिनके हटाने के बावजूद वे बार-बार नया घोंसला बनाने लगती थीं।

प्रश्न 4: अंत में पिताजी और परिवार का विचार गौरैया के प्रति क्यों बदल गया?

उत्तर:

जब पिताजी ने देखा कि गौरैया अपने घोंसले में अपने छोटे-छोटे बच्चों (छोनों) को दाना चुगा रही थीं और प्यार से चहचहा रही थीं, तो उनका दिल पिघल गया। उनका क्रोध शांत हो गया और उन्होंने गौरैया को अपने घर में ही रहने देने का निर्णय लिया।

प्रश्न 5: 'दो गौरैया' कहानी से हमें क्या सीख मिलती है?

उत्तर:

इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि बेजुबान पक्षियों और जीवों के प्रति हमारे मन में दया, प्रेम और सहानभूति की भावना होनी चाहिए। हमें उनके साथ जबरदस्ती करने के बजाय प्रकृति और जीव-जंतुओं के साथ सह-अस्तित्व बनाकर रहना चाहिए।

Class 8 कबीर के दोहे - प्रश्न और उत्तर

 

Class 8

कबीर के दोहे - प्रश्न और उत्तर (Notebook Format)

प्रश्न 1: 'साँच बराबर तप नहीं, झूठ बराबर पाप' से कबीरदास जी क्या कहना चाहते हैं?

उत्तर:

कबीरदास जी के अनुसार, सत्य बोलने से बढ़कर कोई तपस्या या धर्म नहीं है और झूठ बोलने से बढ़कर कोई बड़ा पाप नहीं है। जिस व्यक्ति के हृदय में सत्य का वास होता है, उसके हृदय में स्वयं ईश्वर का निवास होता है।

प्रश्न 2: कबीर जी ने खजूर के पेड़ का उदाहरण देकर किस बात पर प्रकाश डाला है?

उत्तर:

कबीर जी ने खजूर के पेड़ के माध्यम से यह समझाया है कि केवल आकार या धन-दौलत से बड़ा होना व्यर्थ है, यदि आप दूसरों की मदद नहीं कर सकते। खजूर का पेड़ बहुत ऊँचा होता है, लेकिन न तो वह राही को छाया देता है और न ही उसके फल आसानी से मिलते हैं।

प्रश्न 3: गुरु और गोविंद में से कबीर जी ने किसे श्रेष्ठ माना है और क्यों?

उत्तर:

कबीर जी ने गुरु को ईश्वर (गोविंद) से भी श्रेष्ठ माना है। उनका मानना है कि यदि गुरु न होते, तो हमें ईश्वर तक पहुँचने का मार्ग और ज्ञान प्राप्त ही नहीं होता। गुरु ही हमें ईश्वर का ज्ञान कराते हैं।

प्रश्न 4: 'अति का भला न बोलना, अति की भली न चुप' दोहे का भाव स्पष्ट कीजिए।

उत्तर:

इस दोहे का अर्थ है कि किसी भी चीज़ की अति (अत्यधिक मात्रा) बुरी होती है। न तो बहुत अधिक बोलना अच्छा होता है और न ही बिल्कुल चुप रहना। जिस प्रकार अत्यधिक वर्षा और अत्यधिक धूप दोनों नुकसान पहुँचाते हैं, उसी प्रकार वाणी में भी संतुलन होना आवश्यक है।

प्रश्न 5: कबीर जी के अनुसार हमें निंदक (आलोचना करने वाले) को अपने पास क्यों रखना चाहिए?

उत्तर:

निंदक हमारी कमियों और त्रुटियों को बताता है। उसे अपने पास रखने से हम बिना साबुन और पानी के (बिना किसी बड़े प्रयास के) अपनी गलतियों को सुधारकर अपना स्वभाव निर्मल और स्वच्छ बना सकते हैं।

प्रश्न 6: साधु या सज्जन व्यक्ति का स्वभाव कैसा होना चाहिए?

उत्तर:

साधु का स्वभाव 'सूप' (छाज) जैसा होना चाहिए। जैसे सूप अनाज के काम की चीज़ों (सार) को अपने अंदर रख लेता है और कचरे (कचरे/कूड़े) को उड़ाकर बाहर फेंक देता है, वैसे ही सज्जन व्यक्ति को केवल अच्छी बातों को ग्रहण करना चाहिए और बुराइयों को त्याग देना चाहिए।

प्रश्न 7: संगति का मनुष्य के जीवन पर क्या प्रभाव पड़ता है?

उत्तर:

मनुष्य जैसी संगति में रहता है, उसे वैसा ही फल प्राप्त होता है। अच्छे लोगों की संगति से व्यक्ति में सद्गुण आते हैं और बुरी संगति से जीवन का पतन होता है।

हिंदी पत्र लेखन

 

स्थान: [आपका शहर/पता]

दिनांक: [आज की तारीख]

प्रिय मित्र [मित्र का नाम],

सस्नेह नमस्ते।

​मैं यहाँ सकुशल हूँ और आशा करता हूँ कि तुम भी अपने परिवार के साथ सकुशल और आनंद से होगे।

​काफ़ी समय से तुमसे बात नहीं हो पाई थी, इसलिए सोचा कि आज तुम्हें पत्र लिखकर तुम्हारा हाल-चाल पूछ लूँ। हमारी पिछली मुलाकात की यादें आज भी मेरे चेहरे पर मुस्कान ले आती हैं। तुम्हारी पढ़ाई और खेलकूद कैसा चल रहा है?

​इस पत्र के माध्यम से मैं तुम्हें यह भी बताना चाहता था कि आने वाली छुट्टियों में हमारे यहाँ एक छोटा सा कार्यक्रम है। मेरी बहुत इच्छा है कि तुम कुछ दिनों के लिए मेरे घर आओ। हम साथ मिलकर पुराना समय बिताएंगे, नई जगहें घूमेंगे और बहुत सारी बातें करेंगे।

​चाचा जी और चाची जी को मेरा सादर प्रणाम कहना और [छोटे भाई/बहन का नाम] को बहुत सारा प्यार। अपने आने की तारीख मुझे जल्दी पत्र लिखकर या फोन करके बताना।

​तुम्हारे पत्र का इंतज़ार रहेगा।

तुम्हारा अभिन्न मित्र,

[आपका नाम]

Class 10 अभ्यास प्रश्न

  1. साना-साना हाथ जोड़ि (मधु कांकरिया) ​ प्रश्न 1: गंतोक को 'मेहनतकश बादशाहों का शहर' क्यों कहा गया है? ​ प्रश्न 2: जितेन नार्...