रविवार, 3 मई 2026

कक्षा 10 – हिंदी विषय – अवकाश कालीन गृहकार्य*

 *कक्षा 10 – हिंदी विषय – अवकाश कालीन गृहकार्य*  

*स्तर*: बोर्ड परीक्षा की तैयारी + सृजनात्मक अभिव्यक्ति + जीवन-मूल्य  

*निर्देश*: प्रत्येक प्रश्न 200-250 शब्दों में। मौलिकता, भाषा-शुद्धता व प्रस्तुति पर विशेष ध्यान। उत्तर A4 शीट पर लिखें।


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*5 दीर्घ उत्तरीय प्रश्न – 20 अंक प्रत्येक – कुल 100 अंक*


*1. अनुच्छेद लेखन + चिंतनपरक विषय – ‘AI की दुनिया में मानवीय संवेदनाएँ’*  

*प्रश्न*: ‘कृत्रिम बुद्धिमत्ता मनुष्य की जगह ले सकती है, पर उसकी संवेदनाएँ नहीं’ – इस कथन के पक्ष-विपक्ष में तर्क देते हुए एक विचारात्मक अनुच्छेद लिखिए। अपने आस-पास के 2 उदाहरण देकर स्पष्ट कीजिए कि तकनीक के युग में ‘करुणा’ और ‘सहानुभूति’ को बचाए रखना क्यों जरूरी है?  

*कौशल*: तार्किक चिंतन + समसामयिक बोध + अनुभव। *अनुप्रयोग*: अनुच्छेद-लेखन, CBSE लेखन-कौशल।


*2. अनौपचारिक पत्र + प्रेरणा – ‘बोर्ड परीक्षा के दबाव से जूझ रहे मित्र को पत्र’*  

*प्रश्न*: आपका घनिष्ठ मित्र 10वीं बोर्ड परीक्षा के तनाव के कारण अवसाद में है। उसे प्रोत्साहित करते हुए एक अनौपचारिक पत्र लिखिए। पत्र में अपना कोई निजी अनुभव साझा करें जब आपने दबाव पर जीत पाई हो। उसे 4 व्यावहारिक ‘स्ट्रेस-मैनेजमेंट टिप्स’ भी दीजिए।  

*संरचना*: पता, दिनांक, संबोधन, विषय-वस्तु, शुभकामना, भवदीय।  

*कौशल*: भावनात्मक बुद्धिमत्ता + अनुभव + परामर्श। *अनुप्रयोग*: अनौपचारिक पत्र, जीवन-कौशल।


*3. संवाद लेखन + राष्ट्रीय चेतना – ‘1947 और 2047 का भारत’*  

*प्रश्न*: स्वतंत्रता संग्राम के एक क्रांतिकारी और वर्ष 2026 के एक किशोर के बीच ‘भारत @100’ विषय पर 20-22 पंक्तियों का काल्पनिक संवाद लिखिए। क्रांतिकारी 1947 के सपनों की बात करे और किशोर 2047 के भारत की अपनी कल्पना बताए। संवाद से ‘कर्तव्य-बोध’ का संदेश निकले।  

*कौशल*: ऐतिहासिक कल्पना + भविष्य-दृष्टि + संवाद-कला। *अनुप्रयोग*: संवाद-लेखन, मूल्य-शिक्षा।


*4. व्याकरण का साहित्यिक अनुप्रयोग – ‘रस की धारा’*  

*प्रश्न*: ‘वर्षा ऋतु का पहला दिन’ विषय पर एक लघु-कथा लिखिए जिसमें शृंगार, करुण, वीर और हास्य – इन चार रसों का कम-से-कम एक-एक बार सटीक प्रयोग हो। कथा के अंत में तालिका बनाकर बताइए: वाक्य, रस का नाम, स्थायी भाव।  

*कौशल*: रस-निष्पत्ति + सृजनात्मकता + व्याकरण। *अनुप्रयोग*: काव्यशास्त्र, CBSE प्रश्न 10-12 अंक वाला।


*5. आत्मकथात्मक शैली + समास/वाक्य-भेद – ‘मैं हूँ एक टूटा हुआ विश्वास’*  

*प्रश्न*: स्वयं को ‘टूटा हुआ विश्वास’ मानकर आत्मकथा लिखिए। बताइए कि आप कैसे बने, किसने तोड़ा, टूटने के बाद आपका क्या प्रभाव पड़ा? आत्मकथा में कम-से-कम 2 द्वंद्व समास, 2 तत्पुरुष समास, 2 मिश्र वाक्य और 2 संयुक्त वाक्य का प्रयोग कीजिए। सभी को रेखांकित कर हाशिये पर भेद लिखिए।  

*कौशल*: मानवीकरण + समास + वाक्य-रचना। *अनुप्रयोग*: व्याकरण + भाव-प्रवण लेखन, बोर्ड व्याकरण 10 अंक।


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कक्षा 9 – हिंदी विषय – अवकाश कालीन गृहकार्य*

 *कक्षा 9 – हिंदी विषय – अवकाश कालीन गृहकार्य*  

*उद्देश्य*: सृजनात्मकता, कल्पनाशीलता, अनुभव आधारित अभिव्यक्ति एवं भाषा का व्यावहारिक अनुप्रयोग  

*निर्देश*: प्रत्येक प्रश्न 180-200 शब्दों में। मौलिकता व भाषा-शुद्धता अनिवार्य। सजावट व चित्र से उत्तर को प्रभावी बनाएँ।


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*5 दीर्घ उत्तरीय प्रश्न – 20 अंक प्रत्येक – कुल 100 अंक*


*1. अनुच्छेद लेखन + अनुभव – ‘जब सोशल मीडिया एक दिन के लिए बंद हो गया’*  

*प्रश्न*: कल्पना कीजिए कि पूरी दुनिया में 24 घंटे के लिए इंटरनेट और सोशल मीडिया बंद कर दिया गया। उस दिन आपके घर, मोहल्ले और स्वयं आपके जीवन में क्या बदलाव आए? लोगों की प्रतिक्रिया कैसी रही? इस अनुभव से आपको तकनीक के प्रयोग पर क्या सीख मिली?  

*संकेत बिंदु*: सुबह से रात तक का वर्णन, सकारात्मक-नकारात्मक प्रभाव, आत्म-चिंतन।  

*कौशल*: कल्पना + तार्किक विश्लेषण + अनुच्छेद-संरचना। *अनुप्रयोग*: अनुच्छेद लेखन।


*2. अनौपचारिक पत्र + भावाभिव्यक्ति – ‘छोटे भाई को समय प्रबंधन की सीख’*  

*प्रश्न*: आपका छोटा भाई कक्षा 6 में है। वह दिनभर मोबाइल गेम खेलता है और पढ़ाई नहीं करता। उसे समय-प्रबंधन का महत्व समझाते हुए एक अनौपचारिक पत्र लिखिए। पत्र में 3 व्यावहारिक सुझाव दीजिए और अपना कोई अनुभव भी साझा कीजिए जिससे वह प्रेरित हो।  

*संरचना*: संबोधन, विषय, कुशल-क्षेम, मुख्य बात, समापन, नाम।  

*कौशल*: अनुभव + परामर्श + भाव। *अनुप्रयोग*: अनौपचारिक पत्र-लेखन।


*3. संवाद लेखन + समसामयिक विषय – ‘प्लास्टिक बनाम कुल्हड़’*  

*प्रश्न*: ‘प्लास्टिक का गिलास’ और ‘मिट्टी का कुल्हड़’ – दोनों के बीच एक नुक्कड़ पर बहस हो रही है। दोनों अपने-अपने फायदे गिना रहे हैं। 16-18 पंक्तियों का रोचक संवाद लिखिए जिसमें पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी आए। संवाद को उचित शीर्षक दीजिए।  

*कौशल*: कल्पना + मानवीकरण + तर्क-वितर्क। *अनुप्रयोग*: संवाद-लेखन, पर्यावरण-चेतना।


*4. व्याकरण का रचनात्मक अनुप्रयोग – ‘अलंकारों की बारात’*  

*प्रश्न*: एक लघु-कथा लिखिए ‘अलंकारों की बारात’ शीर्षक से। शर्त: कथा में उपमा, रूपक, अनुप्रास, श्लेष और मानवीकरण – इन पाँचों अलंकारों का कम-से-कम एक-एक बार सटीक प्रयोग हो। कथा के अंत में तालिका बनाकर बताइए कि कौन-सा वाक्य किस अलंकार का उदाहरण है।  

*कौशल*: सृजन + अलंकार की पहचान + अनुप्रयोग। *अनुप्रयोग*: व्याकरण को कथा में पिरोना।


*5. आत्मकथात्मक शैली + मुहावरे/लोकोक्ति – ‘मैं हूँ एक पुरानी हिंदी की पुस्तक’*  

*प्रश्न*: अपने-आप को 20 साल पुरानी हिंदी की पाठ्य-पुस्तक मानकर आत्मकथा लिखिए। बताइए कि आप किन-किन हाथों से गुजरीं, बच्चों ने आपके साथ कैसा व्यवहार किया, आज आपकी दशा कैसी है? आत्मकथा में कम-से-कम 6 मुहावरों या 3 लोकोक्तियों का सार्थक प्रयोग कीजिए और उन्हें रेखांकित कीजिए।  

*कौशल*: कल्पना + मानवीकरण + मुहावरे-लोकोक्ति। *अनुप्रयोग*: व्याकरण + मूल्य-शिक्षा।


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शनिवार, 2 मई 2026

कक्षा 8 – हिंदी विषय – अवकाश कालीन गृहकार्य*

 *कक्षा 8 – हिंदी विषय – अवकाश कालीन गृहकार्य*  

*स्तर*: उच्च स्तरीय – तर्क, विश्लेषण, सृजन और जीवन-मूल्यों का समावेश  

*निर्देश*: प्रत्येक प्रश्न 150-180 शब्दों में। मौलिकता अनिवार्य। चित्र, नारा, कविता, तालिका आदि से उत्तर समृद्ध कीजिए।


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### *5 दीर्घ उत्तरीय प्रश्न – उच्च स्तरीय – 10 अंक प्रत्येक*


#### *1. व्यंग्य-लेखन + सामाजिक अनुप्रयोग – ‘मोबाइल बना तीसरा हाथ’*  

*प्रश्न*: कल्पना कीजिए कि वर्ष 2050 में हर मनुष्य के तीन हाथ हैं – तीसरा हाथ ‘मोबाइल’ है। इस स्थिति पर एक व्यंग्यात्मक लेख लिखिए। बताइए कि रिश्तों, पढ़ाई, खेल और स्वास्थ्य पर इसका क्या असर पड़ा? लेख के अंत में ‘मोबाइल-संयम’ पर एक नारा भी दीजिए।  

*कौशल*: कल्पना + व्यंग्य + सामाजिक चिंतन। *अनुप्रयोग*: निबंध व नारा-लेखन, तकनीक का विवेकपूर्ण प्रयोग।


#### *2. रिपोर्ट + अनुभव – ‘मैं बना एक दिन का रिपोर्टर’*  

*प्रश्न*: आप एक दिन के लिए अपने शहर के ‘बाल-रिपोर्टर’ बन गए। बाजार, अस्पताल या रेलवे स्टेशन – किसी एक स्थान पर जाकर वहाँ की सफाई, भीड़, सुविधा-असुविधा पर रिपोर्ट तैयार कीजिए। अपनी रिपोर्ट में 5 लोगों से बातचीत के अंश, 3 समस्याएँ और 3 व्यावहारिक समाधान भी लिखिए। रिपोर्ट को समाचार की शैली में लिखिए।  

*कौशल*: अवलोकन + साक्षात्कार + समस्या-समाधान। *अनुप्रयोग*: रिपोर्ट-लेखन, नागरिक बोध।


#### *3. डायरी + आत्म-विश्लेषण – ‘जब मेरी अंतरात्मा ने मुझे टोका’*  

*प्रश्न*: छुट्टियों में हुई ऐसी एक घटना लिखिए जब आपसे कोई गलती हुई और आपकी अंतरात्मा ने आपको टोका। घटना क्या थी? आपने पहले क्या सोचा, फिर क्या किया? उस अनुभव से आपको कौन-सा जीवन-मूल्य सीखने को मिला? इसे डायरी-प्रविष्टि की शैली में 2 दिन की तिथि डालकर लिखिए।  

*कौशल*: आत्म-विश्लेषण + नैतिक मूल्य + अनुभव। *अनुप्रयोग*: डायरी-लेखन, चरित्र-निर्माण।


#### *4. संवाद + विज्ञान-कथा – ‘2075 से आया मेहमान’*  

*प्रश्न*: कल्पना कीजिए वर्ष 2075 से एक बाल-वैज्ञानिक टाइम-मशीन से आपके घर आया है। वह 2026 की दुनिया देखकर हैरान है। आपके और उसके बीच 12-15 पंक्तियों का संवाद लिखिए। संवाद में वह भविष्य की 3 तकनीकें बताए और आप वर्तमान की 3 समस्याएँ बताकर उससे समाधान पूछें। संवाद का एक रोचक शीर्षक भी दीजिए।  

*कौशल*: वैज्ञानिक कल्पना + तर्क + संवाद। *अनुप्रयोग*: संवाद-लेखन, भविष्य-दृष्टि।


#### *5. काव्य-सृजन + व्याकरण अनुप्रयोग – ‘विशेषणों से सजी मेरी माँ’*  

*प्रश्न*: ‘माँ’ विषय पर 12 पंक्तियों की एक स्वरचित कविता लिखिए। शर्त: कविता में कम-से-कम 8 गुणवाचक विशेषण, 2 संख्यावाचक विशेषण और 2 परिमाणवाचक विशेषण होने चाहिए। कविता के बाद सभी विशेषणों की तालिका बनाइए – विशेषण, भेद, विशेष्य। कविता को एक बॉर्डर से सजाइए।  

*कौशल*: काव्य-सृजन + व्याकरण का अनुप्रयोग + भाव-प्रवणता। *अनुप्रयोग*: विशेषण, कविता-लेखन।


--- इस कार्य को हिंदी की नोटबुक में लिखिए।

कक्षा 7 – हिंदी विषय – अवकाश कालीन गृहकार्य*

 *कक्षा 7 – हिंदी विषय – अवकाश कालीन गृहकार्य*  

*उद्देश्य*: रचनात्मकता, कल्पनाशीलता, निजी अनुभव और भाषा का व्यावहारिक अनुप्रयोग  

*निर्देश*: प्रत्येक प्रश्न 120-150 शब्दों में लिखिए। उत्तर को चित्र, संवाद, डायरी-प्रविष्टि, विज्ञापन आदि से सजाइए। शुद्ध वर्तनी और विराम-चिह्न का ध्यान रखें।


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### *5 दीर्घ उत्तरीय प्रश्न – 10 अंक प्रत्येक*


#### *1. आत्मकथा लेखन – ‘मैं हूँ एक पुरानी साइकिल’*  

*प्रश्न*: कल्पना कीजिए कि आप एक 10 साल पुरानी साइकिल हैं। अपने जन्म से लेकर आज तक की यात्रा अपनी जुबानी लिखिए। आपको किसने खरीदा, आपने किन-किन रास्तों पर सफर किया, अब आपकी हालत कैसी है? अंत में बच्चों को क्या संदेश देना चाहेंगी?  

*कौशल*: कल्पनाशक्ति + मानवीकरण अलंकार + वस्तुओं के प्रति संवेदना। *अनुप्रयोग*: आत्मकथा विधा।


#### *2. अनुभव आधारित लेख – ‘जब मैंने पहली बार कुछ नया सीखा’*  

*प्रश्न*: इन छुट्टियों में आपने दादी-नानी, माता-पिता या किसी बुजुर्ग से कोई नया काम सीखा – जैसे अचार बनाना, पतंग बनाना, बागवानी, सिलाई आदि। उस अनुभव को ‘सीखने की डायरी’ के रूप में लिखिए। क्या कठिन लगा? किसने मदद की? सीखकर कैसा लगा?  

*कौशल*: निजी अनुभव + क्रमबद्ध वर्णन + भाववाचक संज्ञा। *अनुप्रयोग*: डायरी-लेखन।


#### *3. विज्ञापन + संवाद – ‘मेरे मोहल्ले का सुपरहीरो’*  

*प्रश्न*: आपके मोहल्ले/गाँव में कोई व्यक्ति है जो बिना बताए सबकी मदद करता है – जैसे सफाईकर्मी, दूधवाला, गार्ड, डाकिया। उसे ‘मोहल्ले का सुपरहीरो’ मानकर एक आकर्षक विज्ञापन तैयार कीजिए। साथ में आप और उस सुपरहीरो के बीच 8-10 पंक्तियों का काल्पनिक संवाद भी लिखिए।  

*कौशल*: रचनात्मकता + विज्ञापन की भाषा + संवाद-लेखन। *अनुप्रयोग*: व्यावहारिक हिंदी।


#### *4. पत्र + समस्या समाधान – ‘कलेक्टर महोदय को पत्र’*  

*प्रश्न*: आपके शहर के पार्क में झूले टूटे हैं, कूड़ा फैला है और पेड़ सूख रहे हैं। कलेक्टर को औपचारिक पत्र लिखकर समस्या बताइए और 3 सुझाव भी दीजिए कि पार्क को सुंदर कैसे बनाया जाए। पत्र में अपने सुझावों को बुलेट में लिखिए।  

*कौशल*: औपचारिक पत्र + समस्या-अनुप्रयोग + सुझाव कौशल। *अनुप्रयोग*: नागरिक जागरूकता।


#### *5. कहानी में व्याकरण – ‘विशेषणों का मेला’*  

*प्रश्न*: एक ऐसी कहानी लिखिए जिसके हर वाक्य में कम-से-कम एक विशेषण हो। कहानी का विषय: ‘मेले में खोया बस्ता’। कहानी के अंत में उन सभी 10 विशेषणों को रेखांकित करके अलग लिखिए और बताइए वे किसकी विशेषता बता रहे हैं। कहानी का एक सीन भी बनाइए।  

*कौशल*: कल्पना + विशेषण की पहचान + रचनात्मक लेखन। *अनुप्रयोग*: व्याकरण को कहानी में उतारना।

कक्षा 6 – हिंदी विषय – अवकाश कालीन गृहकार्य*

 *कक्षा 6 – हिंदी विषय – अवकाश कालीन गृहकार्य*  

*उद्देश्य*: रचनात्मकता, कल्पनाशक्ति, निजी अनुभव और हिंदी भाषा-कौशल का विकास  

*निर्देश*: प्रत्येक प्रश्न का उत्तर 100-120 शब्दों में लिखिए। चित्र, रंग, सजावट से उत्तर को आकर्षक बनाइए।


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### *5 दीर्घ उत्तरीय प्रश्न*


#### *1. कल्पना की उड़ान – ‘अगर मैं एक पेड़ होता’*  

*प्रश्न*: कल्पना कीजिए कि आप एक पेड़ बन गए हैं। आप कहाँ खड़े हैं? आपको कौन-कौन मिलता है? गर्मी, बारिश, सर्दी में आपका अनुभव कैसा रहता है? पेड़ बनकर आप मनुष्यों को क्या संदेश देना चाहेंगे?  

*भाषा-कौशल*: संज्ञा, विशेषण, पर्यायवाची का प्रयोग। कल्पनाशक्ति + पर्यावरण जागरूकता।


#### *2. मेरा अवकाश, मेरा अनुभव – ‘छुट्टियों की सबसे मीठी याद’*  

*प्रश्न*: इन गर्मी की छुट्टियों में आपके साथ घटी एक ऐसी घटना लिखिए जिसे आप कभी नहीं भूलेंगे। उस दिन क्या खास हुआ था? आपको कैसा लगा? उस अनुभव से आपने क्या सीखा?  

*भाषा-कौशल*: अनुच्छेद लेखन, भाववाचक संज्ञा, विराम-चिह्न। निजी अनुभव + अभिव्यक्ति।


#### *3. पत्र-लेखन में रचनात्मकता – ‘चाँद को पत्र’*  

*प्रश्न*: कल्पना कीजिए कि चाँद आपका दोस्त है। उसे एक पत्र लिखिए। पत्र में बताइए कि आप रात में उसे देखकर क्या सोचते हैं। उससे कोई तीन सवाल भी पूछिए। पत्र का प्रारूप सही रखिए।  

*भाषा-कौशल*: अनौपचारिक पत्र, संबोधन, प्रश्नवाचक वाक्य। कल्पना + पत्र-लेखन।


#### *4. चित्र देखो, कहानी बुनो*  

*प्रश्न*: नीचे दिए विषयों में से किसी एक पर आधारित कहानी लिखिए और उसका एक चित्र भी बनाइए:  

   *(क)* एक बूढ़ा बरगद और छोटी चिड़िया की दोस्ती  

   *(ख)* स्कूल बैग ने की छुट्टी की सैर  

   *(ग)* बारिश की पहली बूँद की आत्मकथा  

कहानी में संवाद भी लिखिए और उसे एक उचित शीर्षक दीजिए।  

*भाषा-कौशल*: कहानी-तत्व, संवाद-लेखन, शीर्षक। रचनात्मकता + कला एकीकरण।


#### *5. शब्दों का खेल – ‘मेरी नई शब्द-डायरी’*  

*प्रश्न*: छुट्टियों में आपने जो 10 नए हिंदी शब्द सीखे, उनकी एक ‘शब्द-डायरी’ बनाइए। प्रत्येक शब्द का अर्थ, वाक्य-प्रयोग और उससे मिलता-जुलता एक चित्र बनाइए। अंत में बताइए कि इनमें से आपको सबसे सुंदर शब्द कौन-सा लगा और क्यों?  

*भाषा-कौशल*: शब्द-भंडार, वाक्य-रचना, अर्थग्रहण। अनुभव + भाषा समृद्धि।


हिंदी की नोटबुक में लिखिए।

सोमवार, 13 अप्रैल 2026

ज्ञानकर्मी कुलपति : डा जनार्दन वाघमारे

ज्ञानकर्मी कुलपति : डा जनार्दन वाघमारे 

केवल ज्ञान के बल पर सभी उच्च पदों पर पहुँचने वाले, अखंड रूप से ज्ञानयज्ञ चलाने वाले ज्ञानर्षि डॉ. जनार्दन वाघमारे सर थे। वे केवल पदों से बड़े नहीं थे, बल्कि उनकी वैचारिक ऊंचाई भी थी। उन्होंने आयुष्यभर ज्ञान, प्रामाणिकता और समाजप्रेम का ध्यास लिया। शिक्षा क्षेत्र में उन्होंने जो कार्य किया है, वह अमूल्य है। नवनिर्मित स्वामी रामानंद तीर्थ मराठवाड़ा विश्वविद्यालय के वे संस्थापक कुलपति थे। वे कुलपति थे, उस समय मैं इस विश्वविद्यालय का विद्यार्थी था। इस विश्वविद्यालय ने हमें बनाया। सर ने इस विश्वविद्यालय को भारतभर में नाम दिलाया। उन्होंने अपने पद का उपयोग दलित, वंचित, दुर्बल, दुर्लक्षित घटकों के लिए किया। कई नए प्रयोग किए। वे लातूर के नगराध्यक्ष बने। बाद में वे राज्यसभा में भी गए। वहाँ भी अपनी अध्ययनपूर्ण मांडणी से उन्होंने राज्यसभा को गाजाया। मराठी, हिंदी और अंग्रेजी इन तीनों भाषाओं पर उनका प्रभुत्व था। वे राज्यपाल बनने की भी संभावना थी। उनकी अत्यंत ओघवती, शांत अध्ययनपूर्ण व्याख्यान सुनने का एक भी अवसर मैंने और मेरे सहपाठियों ने नहीं छोड़ा। वह समय इंजीनियरिंग कॉलेज के प्राध्यापकों को कुलपति नियुक्त करने का नहीं था। कुलपति क्या होता है, इस पद का आब कैसे रखना है, इसकी जाणीव रखने वाला वह समय था। विश्वविद्यालय अपने जाति के या संगठन के लोगों के लिए कुरण समझने के समय में उनका निधन होना बड़ी हानि है। विश्वविद्यालय के पहले कुलपति के रूप में उन्होंने केवल प्रशासनिक जिम्मेदारी नहीं निभाई, बल्कि विश्वविद्यालय को मूल्याधिष्ठित शिक्षा की दिशा दी। शिक्षा केवल पदवी प्राप्त करने का साधन नहीं, बल्कि जीवन घड़ने की प्रक्रिया है, इस पर उनका ठाम विश्वास था। लातूर के नगराध्यक्ष के रूप में कार्य करते समय उन्होंने शहर विकास के साथ ही संस्कार और सामाजिक बांधिलकी पर जोर दिया। प्रशासन में पारदर्शिता, निर्णय में धैर्य और लोगों के प्रति आत्मीयता उनकी कार्यशैली की विशेषताएँ थीं। उनके जीवन का एक प्रेरणादायक प्रसंग है जीवन कैसे जीना है, इसकी खोज। वडवळ नामक इस बेट पर पुस्तकें और दशम्या लेकर छह मित्रों ने तीन दिन चिंतन-चर्चा की। सुखी जीवन का मूलमंत्र खोजने का यह प्रयास उनके विचारशील वृत्ति का प्रतीक है। केवल अपने लिए नहीं, बल्कि समाज के लिए आदर्श जीवन कैसे घड़ाना है, इसके लिए उन्होंने आयुष्य व्यतीत किया। आज उन छह मित्रों में से 'शेवटचे पान गळून पडले', यह जाणीव मन हेलावून टाकने वाली है। वे बताते हैं, 'उन तीन दिनों में सभी ने अपने को क्या बनाना है, किसका आदर्श सामने रखना है, यह लिखकर चिट्ठियाँ टाकीं। दिगंबरराव होळीकर ने एक एक चिट्ठी उठाकर उसे पढ़कर सुनाया। दिगंबरराव होळीकर ने योगीराज श्रीकृष्ण का आदर्श रखा था। उनके ऊपर गीता का प्रभाव था। वे कर्मयोगी बनना चाहते थे। निवृत्तीराव होळीकर ने स्वामी श्रद्धानंद का आदर्श रखा था। वे आर्यसमाज और देश की निरंतर सेवा करना चाहते थे। रामप्रसाद बाहेती ज्ञानेश्वरी के भक्त थे। उन्हें भक्तियोग पसंद था। ज्ञानेश्वर का आदर्श उन्होंने रखा था। नागनाथराव सूर्यवंशी ने न्याय महादेव गोविंद रानडे का आदर्श रखा था। न्याय रानडे के विचार उन्हें आत्मसात करने थे। गणपतराव बाजूळगे प्रसिद्ध चित्रकार बनना चाहते थे। चित्रकला का उन्हें बचपन से ही छंद था। जनार्दन वाघमारे ने मर्यादापुरुषोत्तम राम का आदर्श रखा था। वे सत्यवचनी और न्यायी बनना चाहते थे। हम सभी अपने समाज और देश की निःस्वार्थ सेवा करना चाहते थे। जातिव्यवस्था के कारण इस देश की प्रचंड हानि हुई है, इसलिए हम अंतरजातीय विवाह के माध्यम से जातिव्यवस्था को छेद देना चाहते थे। सभी ने व्यसनाधीनता से दूर रहने का निश्चय किया था। तीन दिनों की चर्चा में हमने अपने को क्या करना है, इसका गहराई से विचार किया। दिगंबरराव होळीकर ने इन चिट्ठियों को पढ़कर सुनाने के बाद सभी ने अपना मनोगत व्यक्त किया और प्रतिज्ञा ली।' यह डॉ. वाघमारे सर ने 'देवमाणूस' पुस्तक प्रकाशन समारोह में बताया था। यह दशकपूर्ति अंक में भी लिखा गया है। तुकाराम बिरादार लिखित 'देव तेथेचि जाणावा' नामक होळकर सर के चरित्र को लिखी गई प्रस्तावना में भी इसका उल्लेख है। होळकर सर के कहने पर गाववालों ने अपने परंपरागत आख्यान का त्याग करके केवल होळकर यह आख्यान धारण किया था। इस कारण डॉ. वाघमारे सर पर होळकर सर का प्रचंड प्रभाव था। 'एक नगराध्यक्ष का चिंतन' इस ग्रंथ में उन्होंने शिक्षा क्षेत्र में जैसे लातूर पैटर्न निर्माण हुआ, वैसे ही राजनीति में गुणवत्ता कैसे लाई जाए, इस दृष्टि से चिंतन मांडा। वे नगराध्यक्ष बनना प्लेटो के आदर्श राज्य संकल्पना के प्रत्यक्ष तत्त्वज्ञ राजा का अनुभव करना था। अन्यथा आज के समय में तत्त्वज्ञ व्यक्ति चुनाव प्रक्रिया से चुने जाने की कल्पना भी नहीं की जा सकती। लेकिन लातूर का मतदाता तसा मतभान रखने वाला है, इसलिए वे सीधे जनता से चुनकर आए और नगराध्यक्ष बने। मराठवाड़ा में विचारक साहित्यकार प्राचार्य डॉ. नरहर कुरुंदकर, प्राचार्य डॉ. सुरेंद्र बारलिंगे, प्राचार्य डॉ. हेमचंद्र धर्माधिकारी, प्राचार्य गोविंद गोपछडे और उदगीर के प्राचार्य डॉ. ना. य. डोळे भी प्रचंड विद्वान विचारक लेखक तत्त्वज्ञ साहित्यकार लोकशिक्षक थे, लेकिन उन्हें डॉ. जनार्दन वाघमारे सर जैसा शिक्षा और राजनीति का संतुलन साधना नहीं आया। नामांतर आंदोलन के बाद वे स्वामी रामानंद तीर्थ मराठवाड़ा विश्वविद्यालय नांदेड़ के संस्थापक कुलपति बने। 'मूठभर माती' उनका आत्मचरित्र उनके जीवनप्रवास का प्रामाणिक चित्रण है। उसमें कई पृष्ठों पर होळकर सर का उल्लेख आता है। इस पुस्तक से उनके संघर्ष की, मूल्यनिष्ठता की और आत्मपरीक्षण की झलक मिलती है। उन्होंने अपने यशापयश को प्रांजलता से देखा और समाज के सामने आदर्श रखा। डॉ. जनार्दन वाघमारे का व्यक्तित्व बहुआयामी था। वे अध्ययनशील थे, लेखक थे, संघटक थे और सबसे महत्वपूर्ण यह कि संवेदनशील मानव थे। उन्होंने आयुष्यभर विचारों की मशाल जलाए रखी। समाज में विषमता, अज्ञान और अन्याय के खिलाफ उन्होंने लेखनी और कृती का उपयोग किया। उनके जाने से आज एक विचारधारा रुक गई, ऐसा लगता है, लेकिन उन्होंने दिए विचार, उन्होंने घड़े विद्यार्थी और उन्होंने लिखी पुस्तकें ही उनकी असली स्मृति है। 'माणूस जाता है, लेकिन विचार अमर रहते हैं', यह उनके जीवन ने सिद्ध किया। होळकर सर के अंतिम संस्कार के समय वे बोले थे, 'जीवन का आखिरी टप्पा खत्म होने पर मृत्यु का क्षण आता है। हमें जीवन भी समझना चाहिए और मृत्यु भी समझना चाहिए। जीवन समझना आसान है, लेकिन मृत्यु समझने में देर लगती है। आखिर जीवन और मृत्यु एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। जो कर्मयोग का जीवन जीता है, उसके लिए जीवन और मृत्यु दोनों ही वरदान हैं।' हमारा यह आधारवड हमें छोड़कर चला गया, इसका मनस्वी दुःख है।

     मूल लेखक - प्रा.डा. दत्ताहरी होनराव

      अनुवाद - डी. बी. देवकत्ते 

Class 6 मातृभूमि' पाठ के मुख्य शब्दार्थ:

 मातृभूमि' पाठ के मुख्य शब्दार्थ:

कक्षा 10 – हिंदी विषय – अवकाश कालीन गृहकार्य*

 *कक्षा 10 – हिंदी विषय – अवकाश कालीन गृहकार्य*   *स्तर*: बोर्ड परीक्षा की तैयारी + सृजनात्मक अभिव्यक्ति + जीवन-मूल्य   *निर्देश*: प्रत्येक ...