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शुक्रवार, 11 सितंबर 2026
मित्रता पर अनुच्छेद
विशेषण
Class 9 ऐसी भी बातें होती हैं - प्रश्न और उत्तर
Class 9
ऐसी भी बातें होती हैं - प्रश्न और उत्तर (Notebook Format)
प्रश्न 1: लता जी ने अपने पिता (पं. दीनानाथ मंगेशकर) से क्या-क्या जीवन-मूल्य सीखे?
उत्तर:
लता जी ने अपने पिता से स्वाभिमान, सच्चाई, अनुशासन और लगन के साथ जीना सीखा। उनके पिता ने उन्हें सिखाया कि चाहे परिस्थितियाँ कैसी भी हों, मनुष्य को अपने आत्मसम्मान से समझौता नहीं करना चाहिए और हमेशा सत्य के मार्ग पर चलना चाहिए।
प्रश्न 2: पिताजी की असमय मृत्यु के बाद लता जी के सामने क्या चुनौतियाँ थीं और उन्होंने उनका सामना कैसे किया?
उत्तर:
पिताजी की मृत्यु के समय लता जी की आयु बहुत कम (केवल 13 वर्ष) थी। उन पर अपने पूरे परिवार (माँ और चार भाई-बहनों) के पालन-पोषण की ज़िम्मेदारी आ गई। उन्होंने बिना हार माने गायन और अभिनय के क्षेत्र में कड़ा संघर्ष किया तथा अपने आत्मसम्मान और लगन के बल पर परिवार को संभाला।
प्रश्न 3: संगीत साधना के संदर्भ में लता जी के क्या विचार थे?
उत्तर:
लता जी के अनुसार संगीत केवल एक व्यवसाय नहीं, बल्कि एक साधना और ईश्वर की भक्ति है। वे मानती थीं कि संगीत में निखार निरंतर अभ्यास (रियाज़), समर्पण और पूरी एकाग्रता से ही आता है।
प्रश्न 4: 'ऐसी भी बातें होती हैं' पाठ के आधार पर लता जी के व्यक्तित्व की मुख्य विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर:
लता जी के व्यक्तित्व की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:
- स्वाभिमानी: वे कठिन से कठिन समय में भी अपने आत्मसम्मान से समझौता नहीं करती थीं।
- कर्तव्यनिष्ठ: कम उम्र में ही परिवार की पूरी ज़िम्मेदारी को सहर्ष स्वीकार किया।
- विनम्रता: अत्यधिक प्रसिद्धि और सफलता मिलने के बाद भी उनका व्यवहार अत्यंत सीधा और नम्र था।
- कठोर परिश्रमी: अपने गायन में पूर्णता लाने के लिए घंटों रियाज़ और अभ्यास करती थीं।
प्रश्न 5: इस पाठ से विद्यार्थियों को क्या सीख मिलती है?
उत्तर:
इस पाठ से हमें यह सीख मिलती है कि जीवन में आने वाली मुसीबतों और संकटों से घबराना नहीं चाहिए। ईमानदारी, लगन और स्वाभिमान के साथ निरंतर परिश्रम करने से कठिन से कठिन राह भी आसान हो जाती है।
Class 8 दो गौरैया - प्रश्न और उत्तर
Class 8
दो गौरैया - प्रश्न और उत्तर (Notebook Format)
प्रश्न 1: घर में गौरैया के आ जाने पर परिवार के सदस्यों की पहली प्रतिक्रिया क्या थी?
उत्तर:
घर में गौरैया के आ जाने पर पिताजी और माँ परेशान हो गए। वे गौरैया द्वारा घर में तिनके और कचरा बिखेरने से चिंतित थे, इसलिए उन्होंने गौरैया को घर से बाहर निकालने का फैसला किया।
प्रश्न 2: पिताजी ने गौरैया को घर से भगाने के लिए क्या-क्या उपाय किए?
उत्तर:
पिताजी ने गौरैया को बाहर भगाने के लिए निम्नलिखित उपाय किए:
- घर के खिड़की-दरवाजे बंद कर दिए।
- लाठी/लाठीनुमा डंडे से उन्हें डराने का प्रयास किया।
- उनके द्वारा बनाए जा रहे घोंसले के तिनकों को हटा दिया।
प्रश्न 3: गौरैया को बाहर भगाने के सारे उपाय क्यों असफल हो गए?
उत्तर:
गौरैया बहुत जिद्दी और चतुर थीं। जब भी कोई दरवाजा या खिड़की थोड़ी सी भी खुलती, वे तुरंत अंदर आ जाती थीं। पिताजी द्वारा तिनके हटाने के बावजूद वे बार-बार नया घोंसला बनाने लगती थीं।
प्रश्न 4: अंत में पिताजी और परिवार का विचार गौरैया के प्रति क्यों बदल गया?
उत्तर:
जब पिताजी ने देखा कि गौरैया अपने घोंसले में अपने छोटे-छोटे बच्चों (छोनों) को दाना चुगा रही थीं और प्यार से चहचहा रही थीं, तो उनका दिल पिघल गया। उनका क्रोध शांत हो गया और उन्होंने गौरैया को अपने घर में ही रहने देने का निर्णय लिया।
प्रश्न 5: 'दो गौरैया' कहानी से हमें क्या सीख मिलती है?
उत्तर:
इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि बेजुबान पक्षियों और जीवों के प्रति हमारे मन में दया, प्रेम और सहानभूति की भावना होनी चाहिए। हमें उनके साथ जबरदस्ती करने के बजाय प्रकृति और जीव-जंतुओं के साथ सह-अस्तित्व बनाकर रहना चाहिए।
Class 8 कबीर के दोहे - प्रश्न और उत्तर
Class 8
कबीर के दोहे - प्रश्न और उत्तर (Notebook Format)
प्रश्न 1: 'साँच बराबर तप नहीं, झूठ बराबर पाप' से कबीरदास जी क्या कहना चाहते हैं?
उत्तर:
कबीरदास जी के अनुसार, सत्य बोलने से बढ़कर कोई तपस्या या धर्म नहीं है और झूठ बोलने से बढ़कर कोई बड़ा पाप नहीं है। जिस व्यक्ति के हृदय में सत्य का वास होता है, उसके हृदय में स्वयं ईश्वर का निवास होता है।
प्रश्न 2: कबीर जी ने खजूर के पेड़ का उदाहरण देकर किस बात पर प्रकाश डाला है?
उत्तर:
कबीर जी ने खजूर के पेड़ के माध्यम से यह समझाया है कि केवल आकार या धन-दौलत से बड़ा होना व्यर्थ है, यदि आप दूसरों की मदद नहीं कर सकते। खजूर का पेड़ बहुत ऊँचा होता है, लेकिन न तो वह राही को छाया देता है और न ही उसके फल आसानी से मिलते हैं।
प्रश्न 3: गुरु और गोविंद में से कबीर जी ने किसे श्रेष्ठ माना है और क्यों?
उत्तर:
कबीर जी ने गुरु को ईश्वर (गोविंद) से भी श्रेष्ठ माना है। उनका मानना है कि यदि गुरु न होते, तो हमें ईश्वर तक पहुँचने का मार्ग और ज्ञान प्राप्त ही नहीं होता। गुरु ही हमें ईश्वर का ज्ञान कराते हैं।
प्रश्न 4: 'अति का भला न बोलना, अति की भली न चुप' दोहे का भाव स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
इस दोहे का अर्थ है कि किसी भी चीज़ की अति (अत्यधिक मात्रा) बुरी होती है। न तो बहुत अधिक बोलना अच्छा होता है और न ही बिल्कुल चुप रहना। जिस प्रकार अत्यधिक वर्षा और अत्यधिक धूप दोनों नुकसान पहुँचाते हैं, उसी प्रकार वाणी में भी संतुलन होना आवश्यक है।
प्रश्न 5: कबीर जी के अनुसार हमें निंदक (आलोचना करने वाले) को अपने पास क्यों रखना चाहिए?
उत्तर:
निंदक हमारी कमियों और त्रुटियों को बताता है। उसे अपने पास रखने से हम बिना साबुन और पानी के (बिना किसी बड़े प्रयास के) अपनी गलतियों को सुधारकर अपना स्वभाव निर्मल और स्वच्छ बना सकते हैं।
प्रश्न 6: साधु या सज्जन व्यक्ति का स्वभाव कैसा होना चाहिए?
उत्तर:
साधु का स्वभाव 'सूप' (छाज) जैसा होना चाहिए। जैसे सूप अनाज के काम की चीज़ों (सार) को अपने अंदर रख लेता है और कचरे (कचरे/कूड़े) को उड़ाकर बाहर फेंक देता है, वैसे ही सज्जन व्यक्ति को केवल अच्छी बातों को ग्रहण करना चाहिए और बुराइयों को त्याग देना चाहिए।
प्रश्न 7: संगति का मनुष्य के जीवन पर क्या प्रभाव पड़ता है?
उत्तर:
मनुष्य जैसी संगति में रहता है, उसे वैसा ही फल प्राप्त होता है। अच्छे लोगों की संगति से व्यक्ति में सद्गुण आते हैं और बुरी संगति से जीवन का पतन होता है।
हिंदी पत्र लेखन
स्थान: [आपका शहर/पता]
दिनांक: [आज की तारीख]
प्रिय मित्र [मित्र का नाम],
सस्नेह नमस्ते।
मैं यहाँ सकुशल हूँ और आशा करता हूँ कि तुम भी अपने परिवार के साथ सकुशल और आनंद से होगे।
काफ़ी समय से तुमसे बात नहीं हो पाई थी, इसलिए सोचा कि आज तुम्हें पत्र लिखकर तुम्हारा हाल-चाल पूछ लूँ। हमारी पिछली मुलाकात की यादें आज भी मेरे चेहरे पर मुस्कान ले आती हैं। तुम्हारी पढ़ाई और खेलकूद कैसा चल रहा है?
इस पत्र के माध्यम से मैं तुम्हें यह भी बताना चाहता था कि आने वाली छुट्टियों में हमारे यहाँ एक छोटा सा कार्यक्रम है। मेरी बहुत इच्छा है कि तुम कुछ दिनों के लिए मेरे घर आओ। हम साथ मिलकर पुराना समय बिताएंगे, नई जगहें घूमेंगे और बहुत सारी बातें करेंगे।
चाचा जी और चाची जी को मेरा सादर प्रणाम कहना और [छोटे भाई/बहन का नाम] को बहुत सारा प्यार। अपने आने की तारीख मुझे जल्दी पत्र लिखकर या फोन करके बताना।
तुम्हारे पत्र का इंतज़ार रहेगा।
तुम्हारा अभिन्न मित्र,
[आपका नाम]
गुरुवार, 10 सितंबर 2026
Class 6 Hindi Revision
Class 6 Hindi Revision
पाठ १. मातृभूमि
- मातृभूमि कविता में भारत को किन-किन नामों से पुकारा गया है?
- मातृभूमि कविता में मुख्य रूप से क्या कहा गया है?
- चिड़िया कहाँ चहक रही हैं?
पाठ २. गोल
- गोल इस पाठ के लेखक का परिचय दीजिए।
- जब कवि फर्स्ट ब्राह्मण रेजिमेंट में थे तब उनकी उम्र क्या थी?
- क्या ध्यानचंद के पास सफलता का कोई गुरु-मंत्र था?
पाठ ३. पहली बूंद
- इस कविता के लेखक कौन हैं?
- करूणा विगलित अश्रु किसने बहाए?
- इस पाठ में पृथ्वी के कितने समानार्थी शब्द दिए गए हैं? उन्हें लिखिए।
पाठ ४. हार की जीत
- बाबा भारती के घोड़े का नाम क्या था?
- खड्गसिंह ने घोड़ा चुराने के लिए क्या चाल चली?
- खड्गसिंह और बाबा भारती के आँखों (आँसुओं) में क्या अंतर था?
पाठ ५. रहीम के दोहे
- रहीम के अनुसार संकट के समय हमारा सच्चा मित्र कौन होता है?
- प्रेम का धागा टूटने पर क्या बदलाव आता है?
- धरती और शरीर में क्या समानता है?
पाठ ६. मेरी माँ
- रामप्रसाद बिस्मिल ने अपनी माँ को किस रूप में याद किया है?
- बिस्मिल ने अपने जीवन का बलिदान किसे समर्पित किया?
- लेखक की एकमात्र अंतिम इच्छा क्या थी?
पाठ ७. जलाते चलो
- कवि किसे न रोकने के लिए कह रहा है?
- यह कविता हमें क्या संदेश देती है?
- आगे बढ़ने के मार्ग में क्या आ सकती हैं?
पाठ ८. सत्रिया और बिहू नृत्य
- इस पाठ की लेखिका कौन है?
- बिहू नृत्य किस भारतीय राज्य का प्रसिद्ध लोक नृत्य है?
- सत्रिया नृत्य मुख्य रूप से किससे जुड़ा हुआ है?
मित्रता पर अनुच्छेद
मित्रता मित्रता जीवन का एक अनमोल और सुंदर उपहार है। यह एक ऐसा पवित्र रिश्ता है, जो खून के रिश्तों से परे दिल के जुड़ाव पर आधारित होता है। हम...
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*कक्षा 6 – हिंदी विषय – अवकाश कालीन गृहकार्य* *उद्देश्य*: रचनात्मकता, कल्पनाशक्ति, निजी अनुभव और हिंदी भाषा-कौशल का विकास *निर्देश*: प्...
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*कक्षा 7 – हिंदी विषय – अवकाश कालीन गृहकार्य* *उद्देश्य*: रचनात्मकता, कल्पनाशीलता, निजी अनुभव और भाषा का व्यावहारिक अनुप्रयोग *निर्देश*...
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कक्षा - छठी ( एम डी पी) जल संरक्षण पर पाँच प्रश्न 1.रचनात्मकता: यदि आपको अपने विद्यालय में जल संरक्षण अभियान चलाने का अवसर मिले, तो आप क...