बुधवार, 15 जुलाई 2026

समास, परिभाषा, प्रकार, उदाहरण

​समास की परिभाषा ​दो या दो से अधिक शब्दों (पदों) के मेल से एक नया स्वतंत्र शब्द बनाने की प्रक्रिया को समास कहते हैं। ​समस्तपद (या सामासिक शब्द): समास विधि से बना नया शब्द। ​समाश-विग्रह: समस्तपद के सभी पदों को अलग-अलग करके उनके संबंध को स्पष्ट करना। ​समास के भेद (प्रकार) ​सीबीएसई क्लास 9 के पाठ्यक्रम में मुख्य रूप से निम्नलिखित समास पढ़े जाते हैं: ​1. अव्ययीभाव समास ​जिस समास का पहला पद (पूर्व पद) प्रधान हो और वह कोई अव्यय (जिसका रूप न बदले) हो, उसे अव्ययीभाव समास कहते हैं। इससे बना पूरा पद भी अव्यय की तरह काम करता है। ​उदाहरण: ​यथाशक्ति \rightarrow शक्ति के अनुसार ​प्रतिदिन \rightarrow प्रत्येक दिन / हर दिन ​आजीवन \rightarrow जीवन भर ​भरपेट \rightarrow पेट भरकर ​रातोंरात \rightarrow रात ही रात में ​2. तत्पुरुष समास ​जिस समास में दूसरा पद (उत्तर पद) प्रधान होता है तथा दोनों पदों के बीच की कारक-विभक्ति (को, से, के लिए, का, की, के, में, पर) का लोप हो जाता है, उसे तत्पुरुष समास कहते हैं। ​उदाहरण: ​राजकुमार \rightarrow राजा का कुमार ​ग़मगीन / शोकाकुल \rightarrow शोक से आकुल (व्याकुल) ​रसोईघर \rightarrow रसोई के लिए घर ​देशनिकाला \rightarrow देश से निकाला ​घुड़सवार \rightarrow घोड़े पर सवार ​3. कर्मधारय समास ​जिस समास के दोनों पदों में विशेषण-विशेष्य (एक पद विशेषता बताने वाला और दूसरा जिसकी विशेषता बताई जाए) या उपमान-उपमेय (जिसकी तुलना किसी प्रसिद्ध वस्तु से की जाए) का संबंध हो, उसे कर्मधारय समास कहते हैं। ​उदाहरण: ​नीलकमल \rightarrow नीला है जो कमल ​महात्मा \rightarrow महान है जो आत्मा ​चरणकमल \rightarrow कमल के समान चरण ​चंद्रमुख \rightarrow चंद्रमा के समान मुख ​पीतांबर \rightarrow पीला है जो अंबर (कपड़ा) ​4. द्विगु समास ​जिस समास का पहला पद (पूर्व पद) संख्यावाचक (गिनती बताने वाला) हो और वह किसी समूह या समाहार का बोध कराए, उसे द्विगु समास कहते हैं। ​उदाहरण: ​नवरात्र \rightarrow नौ रात्रियों का समूह ​चौराहा \rightarrow चार राहों का समाहार ​तिरंगा \rightarrow तीन रंगों का समूह ​पंचतत्व \rightarrow पाँच तत्वों का समूह ​सप्ताह \rightarrow सात दिनों का समूह ​5. द्वंद्व समास ​जिस समास के दोनों पद प्रधान होते हैं और विग्रह करने पर उनके बीच में 'और', 'या', 'तथा', 'अथवा' जैसे योजक शब्द लगते हैं, उसे द्वंद्व समास कहते हैं। इसमें अक्सर योजक चिह्न (-) लगा होता है। ​उदाहरण: ​माता-पिता \rightarrow माता और पिता ​रात-दिन \rightarrow रात और दिन ​सुख-दुख \rightarrow सुख और दुख ​पाप-पुण्य \rightarrow पाप या पुण्य ​खट्टा-मीठा \rightarrow खट्टा और मीठा ​6. बहुव्रीहि समास ​जिस समास में कोई भी पद प्रधान नहीं होता, बल्कि दोनों पद मिलकर किसी तीसरे (अन्य) विशेष अर्थ की ओर संकेत करते हैं, उसे बहुव्रीहि समास कहते हैं। ​उदाहरण: ​गजानन \rightarrow गज (हाथी) के समान आनन (मुख) है जिनका \rightarrow अर्थात गणेश जी ​दशानन \rightarrow दस हैं आनन (मुख) जिसके \rightarrow अर्थात रावण ​लंबोदर \rightarrow लंबा है उदर (पेट) जिनका \rightarrow अर्थात गणेश जी ​चतुर्भुज \rightarrow चार हैं भुजाएँ जिनकी \rightarrow अर्थात विष्णु जी ​घनश्याम \rightarrow घन (बादल) के समान श्याम (काले) हैं जो \rightarrow अर्थात कृष्ण जी ​परीक्षा के लिए ज़रूरी टिप: कर्मधारय और बहुव्रीहि समास में अंतर हमेशा उसके विग्रह (अलग करने के तरीके) से पता चलता है। जैसे- "पीतांबर" का विग्रह यदि "पीला है जो अंबर" करेंगे तो वह कर्मधारय होगा, और यदि "पीला है अंबर जिसका अर्थात कृष्ण" करेंगे तो वह बहुव्रीहि होगा।

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