बुधवार, 2 अक्टूबर 2024

व्याकरण - ईमानदारी पर मुहावरे

 यहां ईमानदारी से संबंधित दस मुहावरे और उनके वाक्य दिए गए हैं:


1. ईमान का खरा होना

अर्थ: पूरी तरह से सच्चा और ईमानदार होना

वाक्य: राधेश्याम अपने व्यापार में ईमान का खरा आदमी है, वह कभी धोखा नहीं देता।



2. ईमान बेच देना

अर्थ: लालच में आकर सच्चाई और नैतिकता को छोड़ देना

वाक्य: लालच में आकर उसने अपना ईमान बेच दिया और गलत कामों में लग गया।



3. ईमान पर आंच आना

अर्थ: सच्चाई और इमानदारी पर सवाल उठना

वाक्य: गलत संगत में पड़कर उसके ईमान पर आंच आ गई है।



4. ईमान का सौदा करना

अर्थ: ईमानदारी को त्यागकर स्वार्थी व्यवहार करना

वाक्य: जब उसने रिश्वत ली, तो लोगों ने कहा कि उसने ईमान का सौदा कर लिया।



5. ईमानदारी की मिसाल होना

अर्थ: पूर्ण ईमानदार और आदर्श होना

वाक्य: गाँधीजी को ईमानदारी की मिसाल माना जाता है।



6. ईमान की तिजोरी खाली होना

अर्थ: व्यक्ति में ईमानदारी और नैतिकता का न होना

वाक्य: वह जितना अमीर हो, उतना ही उसकी ईमान की तिजोरी खाली है।



7. ईमान का पक्का होना

अर्थ: विश्वासपात्र और सच्चा होना

वाक्य: मोहन ईमान का पक्का आदमी है, उस पर पूरा भरोसा किया जा सकता है।



8. ईमान का झंडा बुलंद रखना

अर्थ: हर स्थिति में ईमानदारी बनाए रखना

वाक्य: विपरीत परिस्थितियों में भी उसने अपने ईमान का झंडा बुलंद रखा।



9. ईमान से मुंह मोड़ना

अर्थ: ईमानदारी छोड़ देना

वाक्य: अब लोग पैसा कमाने के चक्कर में ईमान से मुंह मोड़ने लगे हैं।



10. ईमान का सौदा नहीं करना

अर्थ: ईमानदारी को किसी भी कीमत पर न छोड़ना

वाक्य: उसने भले ही गरीबी झेली हो, पर कभी ईमान का सौदा नहीं किया।




व्याकरण - पानी पर मुहावरे

 यहां पानी से संबंधित दस मुहावरे और उनके वाक्य दिए गए हैं:


1. पानी-पानी होना

अर्थ: शर्मिंदा होना

वाक्य: सबके सामने गलती स्वीकार करने पर वह पानी-पानी हो गया।



2. पानी सिर के ऊपर से गुजरना

अर्थ: बहुत ज्यादा हो जाना

वाक्य: अब तो उनकी ज्यादतियाँ पानी सिर के ऊपर से गुजर गई हैं, अब कार्रवाई करनी पड़ेगी।



3. पानी उतारना

अर्थ: घमंड तोड़ना

वाक्य: हार के बाद उसके घमंड का पानी उतर गया।



4. पानी भरना

अर्थ: किसी से कमतर होना

वाक्य: वह इतना प्रतिभाशाली है कि उसके सामने बड़े-बड़े विद्वान पानी भरते हैं।



5. पानी मांगना

अर्थ: हार मानना या परास्त होना

वाक्य: खेल में उसकी चालों से विरोधी टीम पानी मांगने लगी।



6. पानी की तरह पैसा बहाना

अर्थ: बहुत अधिक खर्च करना

वाक्य: शादी में उसने पानी की तरह पैसा बहाया।



7. पानी पर लिखी लकीर होना

अर्थ: अस्थाई होना

वाक्य: उसकी बातें पानी पर लिखी लकीर जैसी हैं, जिनका कोई महत्व नहीं।



8. पानी-पतासे एक करना

अर्थ: पूरी कोशिश करना

वाक्य: उसने अपनी नौकरी पाने के लिए पानी-पतासे एक कर दिए।



9. पानी न माँगना

अर्थ: बिना कठिनाई के करना

वाक्य: इस काम में वह इतना माहिर है कि उसे करने में उसे पानी भी नहीं माँगना पड़ा।



10. आंखों में पानी होना

अर्थ: शर्म और स्वाभिमान होना

वाक्य: दूसरों से मदद मांगते हुए उसकी आंखों में पानी था, उसने कभी किसी से कुछ नहीं मांगा।




व्याकरण - आंख पर मुहावरे

 यहां आंख से संबंधित दस मुहावरे और उनके उदाहरण वाक्य दिए गए हैं:


1. आंख का तारा होना

अर्थ: बहुत प्रिय होना

वाक्य: रीना अपने माता-पिता की आंख का तारा है।



2. आंखों में धूल झोंकना

अर्थ: धोखा देना

वाक्य: उसने व्यापार में अपने साथी की आंखों में धूल झोंक कर सारा पैसा हड़प लिया।



3. आंखें दिखाना

अर्थ: गुस्सा प्रकट करना

वाक्य: बच्चों ने जब शरारत की, तो माँ ने उन्हें आंखें दिखाईं।



4. आंखें बिछाना

अर्थ: बड़े प्रेम से इंतजार करना

वाक्य: मां अपने बेटे के आने का इंतजार करते हुए उसकी राह में आंखें बिछाए बैठी थी।



5. आंखें चौंधिया जाना

अर्थ: अचानक चकित या प्रभावित होना

वाक्य: उसकी नई कार देखकर सबकी आंखें चौंधिया गईं।



6. आंख उठाना

अर्थ: बुरी दृष्टि डालना या विरोध करना

वाक्य: गांव में कोई भी उसके घर की ओर आंख उठाकर नहीं देख सकता।



7. आंखों का पानी मरना

अर्थ: लज्जा का समाप्त होना

वाक्य: इतनी गलती करने के बाद भी उसे कोई शर्म नहीं है, लगता है उसकी आंखों का पानी मर चुका है।



8. आंखें फेर लेना

अर्थ: पहचानने से इंकार करना

वाक्य: बुरे समय में उसके अपने ही आंखें फेर लेते हैं।



9. आंखें बंद करके विश्वास करना

अर्थ: पूरी तरह से विश्वास करना

वाक्य: मैं अपने दोस्त पर आंखें बंद करके विश्वास करता हूँ।



10. आंखें छलकना

अर्थ: भावुक हो जाना

वाक्य: अपनी बेटी की विदाई पर पिता की आंखें छलक आईं।




व्याकरण - नाक पर मुहावरे

 यहां नाक से संबंधित दस मुहावरे और उनके उदाहरण वाक्य दिए गए हैं:


1. नाक में दम करना

अर्थ: परेशान करना

वाक्य: शोर मचाने वाले बच्चों ने मेरी नाक में दम कर रखा है।



2. नाक कटना

अर्थ: अपमानित होना

वाक्य: अपनी हरकतों से उसने पूरे परिवार की नाक कटवा दी।



3. नाक रखना

अर्थ: इज्जत बचाना

वाक्य: अच्छे प्रदर्शन से उसने अपनी टीम की नाक रख ली।



4. नाक रगड़ना

अर्थ: बहुत विनम्रता से माफी मांगना

वाक्य: अपनी गलती पर उसे बॉस के सामने नाक रगड़नी पड़ी।



5. नाक ऊँची रखना

अर्थ: प्रतिष्ठा बनाए रखना

वाक्य: सदा सच्चाई के मार्ग पर चलने से उसकी नाक ऊँची रहती है।



6. नाक में नकेल डालना

अर्थ: काबू में करना

वाक्य: सरकार ने नए नियमों से व्यापारियों की नाक में नकेल डाल दी।



7. नाक का बाल होना

अर्थ: किसी के लिए बहुत प्रिय होना

वाक्य: वह अपने माता-पिता की नाक का बाल है।



8. नाक पर मक्खी न बैठने देना

अर्थ: बहुत सतर्क रहना

वाक्य: वह इतना चौकस है कि अपनी नाक पर मक्खी तक नहीं बैठने देता।



9. नाक घिसना

अर्थ: बहुत मेहनत करना

वाक्य: नौकरी पाने के लिए उसे कई जगह नाक घिसनी पड़ी।



10. नाक ऊपर करना

अर्थ: घमंड करना

वाक्य: सफलता मिलते ही उसने सबके सामने नाक ऊपर करनी शुरू कर दी।




मंगलवार, 1 अक्टूबर 2024

लाल बहादुर शास्त्री


श्री लाल बहादुर शास्त्री 


 लाल बहादुर शास्त्री भारत के दूसरे प्रधानमंत्री और सादगी, कर्तव्यपरायणता तथा साहस के प्रतीक थे। उनका जन्म 2 अक्टूबर 1904 को उत्तर प्रदेश के मुगलसराय में हुआ था। शास्त्री जी का जीवन बेहद साधारण था, लेकिन उनके विचार और कर्म असाधारण थे। उन्होंने देश के प्रति अपने समर्पण से भारतीय राजनीति में एक गहरी छाप छोड़ी।


शास्त्री जी का प्रारंभिक जीवन कठिनाइयों से भरा था। उनके पिता का निधन तब हो गया था, जब वे केवल डेढ़ वर्ष के थे। परिवार की आर्थिक स्थिति कठिन थी, फिर भी उन्होंने अपनी शिक्षा जारी रखी और "शास्त्री" की उपाधि प्राप्त की। शास्त्री जी की सादगी और विनम्रता उनके जीवनभर के गुण रहे।


भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में शास्त्री जी का योगदान महत्त्वपूर्ण रहा। उन्होंने महात्मा गांधी और जवाहरलाल नेहरू के नेतृत्व में कार्य किया और जेल भी गए। उनकी दृढ़ता और साहस ने उन्हें कांग्रेस के भीतर एक प्रभावशाली नेता बना दिया। 1952 में वे रेल मंत्री बने, जहाँ उन्होंने सादगी और ईमानदारी के नए मानदंड स्थापित किए।


शास्त्री जी का प्रधानमंत्री बनना भारत के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ था। 1964 में नेहरू जी के निधन के बाद, उन्होंने देश की बागडोर संभाली। शास्त्री जी का कार्यकाल कई चुनौतियों से भरा था। 1965 में पाकिस्तान के साथ युद्ध के दौरान उन्होंने देश को एकजुट रखा और "जय जवान, जय किसान" का नारा दिया। यह नारा शास्त्री जी की गहरी समझ और देश के जवानों और किसानों के प्रति सम्मान को दर्शाता है।


उनका यह नारा एक प्रेरणादायक काव्यात्मक शैली में गूंजता है:


"जय जवान, जय किसान,

देश की शान, देश की जान।

सीमा पर रक्षा के प्रहरी,

खेतों में अन्नदाता महान।"


शास्त्री जी का यह नारा आज भी भारतीय समाज में उतना ही प्रासंगिक है, जितना उस समय था। उन्होंने देश की सुरक्षा और खाद्य सुरक्षा के बीच गहरा संबंध स्थापित किया। शास्त्री जी ने हरित क्रांति को प्रोत्साहित किया और भारत को खाद्यान्न उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने के लिए ठोस कदम उठाए।


उनकी सादगी, ईमानदारी और देश के प्रति अटूट समर्पण को देखकर एक प्रसिद्ध काव्य पंक्ति याद आती है:


"सादा जीवन, उच्च विचार,

लाल बहादुर के सच्चे संस्कार।"


शास्त्री जी का जीवन संघर्षों से भरा रहा, लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी। 1965 के युद्ध के बाद ताशकंद समझौता करने के लिए वे पाकिस्तान गए, जहाँ 11 जनवरी 1966 को रहस्यमय परिस्थितियों में उनकी मृत्यु हो गई।


लाल बहादुर शास्त्री का जीवन न केवल सादगी और विनम्रता का उदाहरण है, बल्कि यह दिखाता है कि एक सामान्य व्यक्ति भी दृढ़ निश्चय और कर्तव्यपरायणता के बल पर राष्ट्र को एक नई दिशा दे सकता है। उनके योगदान को भारत कभी नहीं भुला सकता।


शास्त्री जी के जीवन की इस प्रेरणा को संजोते हुए हम यही कह सकते हैं:


"तेरा नाम रहेगा इतिहास में,

लिखेगा तुझको जमाना।

तेरी मेहनत, तेरी साधना,

भारत मां का है यह नज़राना।"


लाल बहादुर शास्त्री आज भी हर भारतीय के दिल में देशभक्ति और सादगी की मिसाल के रूप में जीवित हैं।

लाल बहादुर शास्त्री जी की जयंति पर उन्हें शत-शत नमन।




राष्ट्रपिता महात्मा गांधी

   राष्ट्रपिता महात्मा गांधी  


महात्मा गांधी भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के अद्वितीय नेता और अहिंसा के सिद्धांत के प्रवर्तक थे। उनका पूरा नाम मोहनदास करमचंद गांधी था, लेकिन लोग उन्हें सम्मानपूर्वक महात्मा गांधी कहते हैं। उनका जन्म 2 अक्टूबर 1869 को गुजरात के पोरबंदर में हुआ था। गांधी जी ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा भारत में प्राप्त की और बाद में इंग्लैंड जाकर वकालत की पढ़ाई की। वकील के रूप में दक्षिण अफ्रीका में उनके अनुभव ने उनके जीवन को एक नया मोड़ दिया, जहाँ उन्होंने नस्लीय भेदभाव का कड़ा विरोध किया। वहाँ के संघर्ष ने ही उन्हें अहिंसा और सत्याग्रह के मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित किया।


गांधी जी के नेतृत्व में भारत में स्वतंत्रता आंदोलन ने एक नई दिशा प्राप्त की। उन्होंने सत्याग्रह, असहयोग आंदोलन, और दांडी मार्च जैसे अभियानों का नेतृत्व किया। ये आंदोलन न केवल ब्रिटिश शासन के खिलाफ थे, बल्कि देशवासियों में आत्मविश्वास और एकता की भावना भी पैदा करते थे। उन्होंने कहा था, "तुम मुझे मार सकते हो, लेकिन मेरी आत्मा नहीं मर सकती।" यह उनका अदम्य साहस और अडिग विश्वास था कि उन्होंने ब्रिटिश साम्राज्य को बिना हथियार उठाए ही झुका दिया।


महात्मा गांधी ने सदैव सत्य और अहिंसा के मार्ग पर चलने की शिक्षा दी। उन्होंने कहा, "अहिंसा परम धर्म है", और इसे अपने जीवन का आधार बनाया। उनका मानना था कि यदि व्यक्ति के मन में सत्य और अहिंसा के प्रति आस्था हो, तो वह बड़े से बड़ा परिवर्तन कर सकता है। भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के दौरान, उन्होंने धार्मिक सौहार्द, स्वदेशी, और अस्पृश्यता के उन्मूलन जैसे मुद्दों पर भी जोर दिया।


उनकी विचारधारा को लेकर कहा गया है:


"रघुपति राघव राजा राम,

पतित पावन सीता राम।

ईश्वर अल्लाह तेरो नाम,

सबको सन्मति दे भगवान।"


गांधी जी की ये प्रार्थना उनके धार्मिक सहिष्णुता और मानवता के प्रति गहरे विश्वास को दर्शाती है। उनके नेतृत्व में भारत ने 15 अगस्त 1947 को स्वतंत्रता प्राप्त की, लेकिन गांधी जी ने कभी सत्ता का लोभ नहीं किया। उन्होंने जीवनभर साधारण जीवन जिया और अपने कर्तव्यों को सर्वोपरि माना। उनके कार्य और आदर्श आज भी पूरी दुनिया में प्रेरणा का स्रोत बने हुए हैं।


गांधी जी ने एक और महत्वपूर्ण संदेश दिया: "अगर कोई बदलाव देखना चाहते हो, तो पहले खुद को बदलो।" यह वाक्य उनकी सोच और कर्म का प्रतिबिंब था। उन्होंने स्वराज का सपना देखा था, जिसमें हर भारतीय आत्मनिर्भर और स्वतंत्र हो।


30 जनवरी 1948 को नाथूराम गोडसे ने गांधी जी की हत्या कर दी, लेकिन उनकी मृत्यु ने भी उनके विचारों को और भी प्रबल कर दिया।


महात्मा गांधी का जीवन एक ऐसा प्रकाशस्तंभ है जो हमें आज भी सत्य, अहिंसा और प्रेम के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। उनके जीवन पर विचार करते हुए यह पंक्ति अनायास ही याद आती है:


"दे दी हमें आज़ादी बिना खड्ग बिना ढाल,

साबरमती के संत तूने कर दिया कमाल।"


महात्मा गांधी का योगदान युगों-युगों तक भारत और विश्व में याद किया जाएगा।


महात्मा गांधी जी की जयंति पर उन्हें शत-शत नमन।



पद परिचय

 पद परिचय


पद-परिचय को समझने से पहले शब्द और पद का भेद समझना आवश्यक है।


शब्द- वर्णों के सार्थक मेल को शब्द कहते हैं।

शब्द भाषा की स्वतंत्र इकाई होते हैं जिनका अर्थ होता है।

 

पद – जब कोई शब्द व्याकरण के नियमों के अनुसार प्रयुक्त हो जाता है तब उसे पद कहते हैं।

उदाहरण-राम, पत्र, पढ़ना – शब्द हैं।

राम पत्र पढ़ता है।


राम ने पत्र पढ़ा-इन दोनों वाक्यों में अलग-अलग ढंग से प्रयुक्त होकर राम, पत्र और पढ़ता है पद बन गए हैं।





पद-परिचय- वाक्य में प्रयुक्त पदों का विस्तृत व्याकरणिक परिचय देना ही पद-परिचय कहलाता है।



व्याकरणिक परिचय क्या है?


वाक्य में प्रयोग हुआ कोई पद व्याकरण की दृष्टि से विकारी है या अविकारी, यदि बिकारी है तो उसका भेद, उपभेद, लिंग, वचन पुरुष, कारक, काल अन्य शब्दों के साथ उसका संबंध और अविकारी है तो किस तरह का अव्यय है तथा उसका अन्य शब्दों से क या संबंध है आदि बताना व्याकरणिक परिचय कहलाता है।




पदों का परिचय देते समय निम्नलिखित बातें बताना आवश्यक होता है –


संज्ञा–तीनों भेद, लिंग, वचन, कारक क्रिया के साथ संबंध।


सर्वनाम-सर्वनाम के भेद, पुरुष, लिंग, वचन, कारक, क्रिया से संबंध।


विशेषण-विशेषण के भेद, लिंग, वचन और उसका विशेष्य।


क्रिया-क्रिया के भेद, लिंग, वचन, पुरुष, काल, वाच्य,धातु कर्म और कर्ता का उल्लेख।


क्रियाविशेषण-क्रियाविशेषण का भेद तथा जिसकी विशेषता बताई जा रही है, का उल्लेख।


समुच्चयबोधक-भेद, जिन शब्दों या पदों को मिला रहा है, का उल्लेख।


संबंधबोधक-भेद, जिसके साथ संबंध बताया जा रहा है, का उल्लेख।


विस्मयादिबोधक-हर्ष, भाव, शोक, घृणा, विस्मय आदि किसी एक भाव का निर्देश।




क्या लिखूं?

*📚 पीएम श्री केन्द्रीय विद्यालय छत्रपति संभाजीनगर* *कक्षा – 9-C | विषय – हिंदी* *📅 गृहकार्य – 17 जुलाई 2026* *📖 PT-1 पुनरावृत्ति – ...