बुधवार, 8 मार्च 2023

हिंदी विषय का प्रश्न पत्र

 हिंदी विषय का प्रश्न पत्र हल करते समय निम्नलिखित बातों का ध्यान रखना हैं।

1.सर्व प्रथम प्रश्न पत्र को अच्छी तरह से पढ़ना है।

2. दिए गए अपठित गद्यांश एवं काव्यांश पर आधारित प्रश्न एवं उनके विकल्प को ध्यान से पढ़िए। गद्यांश एवं काव्यांश  के आधार पर ही उचित विकल्प का चयन कर उसे पूर्ण लिखना हैं।

3. प्रश्नों का क्रमांक  सही तरह से लिखिए।

4. उत्तर पुस्तिका में काट छांट न करें।

5. पत्र लेखन, अनुच्छेद लेखन और संवाद लेखन आदि को अलग अलग पेज पर लिखिए।

6.लेखन में स्वच्छता एवं शुद्धता की ओर विशेष ध्यान देना हैं।

7. व्याकरण पर आधारित प्रश्नों के उत्तर सोच समझ कर लिखिए।

8.निर्धारित समय में ही प्रश्न पत्र हल करें।

9. पेपर लिखना पूर्ण होने पर फिर एक बार प्रश्न के क्रमांक जांच लिजिए।

10.सभी प्रश्नों को हल करना हैं।  

11. कोई भी प्रश्न अनुत्तरित नहीं छोड़ना हैं।

परीक्षा के लिए बहुत बहुत शुभकामनाएं।


         



महिला दिवस

 विश्व महिला दिवस की आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएं।

रविवार, 3 अक्टूबर 2021

मानसिक संतुलन : मनोदर्पण

       मनोदर्पण   :   मानसिक स्वास्थ्य सप्ताह 

                       (Mental Health week)

         (4/10/2021 से 10/10/2021)


मानसिक संतुलन : मनोदर्पण   

*परिभाषा

*कारण

*उपाय               


पूरी दुनिया में हज़ारों-लाखों लोग मानसिक रोग के शिकार होते हैं और इसका असर उनके साथ साथ उनके पूरे परिवार पर पड़ता है। देखा गया है कि हर चौथे इंसान को कभी-न-कभी मानसिक रोग होता है। दुनिया-भर में इस रोग की सबसे बड़ी वजह है, निराशा।


विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक, मानसिक रोग के शिकार बहुत-से लोग इलाज करवाने से कतराते हैं, क्योंकि उन्हें लगता है कि लोग उनके बारे में न जाने क्या सोचेंगे।


मानसिक रोग से जुड़ी एक संस्था की रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले साल अमेरीका में 8 से 15 की उम्र के जिन बच्चों को मानसिक रोग था, उनमें से करीब 50 प्रतिशत बच्चों का इलाज नहीं करवाया गया। और 15 से ऊपर की उम्र के करीब 60 प्रतिशत लोगों का इलाज नहीं हुआ।


मानसिक रोग क्या है


जब एक व्यक्ति ठीक से सोच नहीं पाता, उसका अपनी भावनाओं और व्यवहार पर काबू नहीं रहता, तो ऐसी हालत को मानसिक रोग कहते हैं। मानसिक रोगी आसानी से दूसरों को समझ नहीं पाता और उसे रोज़मर्रा के काम ठीक से करने में मुश्किल होती है।


इस बारे में लखनऊ के केजीएमयू के मनोचिकित्सा विभाग के विशेषज्ञ डॉ विवेक अग्रवाल बताते हैं, "मानसिक रोग के लक्षण, हर व्यक्ति में अलग-अलग हो सकते हैं। ये इस बात पर निर्भर करते हैं कि उसे कौन-सी मानसिक बीमारी है। मानसिक रोग किसी को भी हो सकता है, फिर चाहे वह आदमी हो या औरत, जवान हो या बुज़ुर्ग, पढ़ा-लिखा हो या अनपढ़, या चाहे वह किसी भी संस्कृति, जाति, धर्म, या तबके का हो।" अगर मानसिक रोगी अच्छी तरह अपना इलाज करवाए, तो वह ठीक हो सकता है। वह एक अच्छी और खुशहाल ज़िंदगी जी सकता है। लेकिन ज्यादातर केस में लोग काउंसलिंग करवाने से डरते हैं कि लोग उन्हें पागल समझेंगे और समस्या बढ़ जाती है। "


मानिसक रोग कई प्रकार के होते हैं, तनाव, डिप्रेशन, चिड़चिड़ापन, गुस्सा ये सभी इसी के अंतर्गत आते हैं।


तनाव


तेज़ी से बदलते माहौल में हमारे शरीर और मन पर जो असर पड़ता है, उसे तनाव कहते है। तनाव दो तरह का होता है। पहला – अच्छा तनाव और दूसरा – बुरा तनाव। जहां अच्छे तनाव की वजह से आप अपनी नौकरी में प्रमोशन पाते है, वहीं बुरे तनाव में आप किसी से गुस्से में बहस कर लेते है।


परिवार, पैसा, काम और स्कूल - ये तनाव के सामान्य कारण है।


  • तनाव के लक्षण


1.सिरदर्द व पीठदर्द

2.नींद न आना

3.गुस्सा और हताश होना

4.किसी एक चीज़ पर ध्यान 

    न लगा पाना

5.रोना

6.दूसरों को नज़रअंदाज़ करना


  • कैसे निपटें :


नियमित रूप से 20 से 30 मिनट शारीरिक व्यायाम (चलना, दौड़ना या उठना बैठना) करें। इससे आपके दिमाग को सोचने का वक्त मिलेगा। मेडिटेशन कीजिए (ध्यान लगाइए) राहत भरा संगीत सुनिए। 10-20 मिनट तक आंखें बंद करके शांति का अनुभव कीजिए। गहरी सांस लीजिए। दिमाग को शांत करें, और तनाव भरी बातें दिमाग से निकाल दें। अख़बार पढ़िए या किसी से बात कीजिए। अपनी भावनाओं को कागज़ पर लिखने से, या किसी से बात करने पर आप ये जान पाएंगे कि आपके तनाव के कारण क्या है।


छोड़ दें ये बुरी आदतें


देर तक सोना तनाव की शुरुआत आपकी सुबह से ही हो सकती है अगर आप रोज देर से सोकर उठते हैं। डॉक्टर भी मानते हैं कि देर से उठने वाले लोगों का मेटाबॉलिज्म ठीक नहीं रहता है जिससे उन्हें थकान, तनाव और उदासीनता अधिक सताती है। शोधों में भी यह माना गया है कि देर से उठने वाले लोग अक्सर सुबह का नाश्ता छोड़ते हैं जिससे उनका बॉडी साइकिल गड़बड़ होता है और वे जल्द तनावग्रस्त होते हैं। घंटों टीवी देखना आपको तनाव और अवसाद की स्थिति तक पहुंचाने के लिए काफी है। बजाय घंटों तक टीवी देखने के आप अपना समय परिवार के साथ बिताएंगे या सैर करेंगे तो तनाव से कोसों दूर रहेंगे। धूम्रपान आपका तनाव बढ़ाती है। धूम्रपान से धड़कन तेज हो जाती है जिससे तनाव बढ़ता है।


डिप्रेशन


एक ऐसी बीमारी है जिसके मरीज आपके आस-पास सबसे ज्यादा नजर आते हैं। आज की तारीख में आम बीमारियों में से एक है डिप्रेशन। बच्चे, जवान और बूढ़े हर तबके के लोग इस बीमारी के शिकार हैं। कारण सबका अलग-अलग हो सकता है पर लक्षण लगभग एक जैसे ही हैं।


क्या है डिप्रेशन


दरअसल डिप्रेशन एक डिसऑर्डर है, जिसमें उदासी की भावना किसी इंसान को दो हफ्ते या इससे भी ज्यादा लंबे वक्त तक घेरे रहती है। इससे जिंदगी के प्रति दिलचस्पी कम हो जाती है। नकारात्मक भावनाएं हावी हो जाती हैं।


डिप्रेशन में किसी भी इंसान को अपना एनर्जी लेवल लगातार घटता महसूस होता है। उसकी रोजमर्रा की जिंदगी भी प्रभावित हुए बिना नहीं रहती।


डिप्रेशन के लक्षण


लगातार उदासी से घिरे रहना। बेचैनी महसूस करना।

 किसी न किसी वजह से मूड खराब रहना।

जिंदगी से कोई उम्मीद न होना। 

घोर निराशा।

अपराध बोध होना, 

हर टाइम जिंदगी को बोझ मानना और 

मनपसंद काम न कर पाने की लाचारी महसूस करना।

पसंदीदा कामों में रुचि न रहना।

नींद न आना। 

तड़के नींद खुल जाना या बहुत ज्यादा नींद आना।

भूख कम लगने से लगातार वजन गिरना।

 जरूरत से ज्यादा खाने से मोटापा।

मन में सुसाइड के ख्याल आना। खुदकुशी की कोशिश करना।


बच्चे भी डिप्रेशन का शिकार


लखनऊ की मनोचिकित्सक डॉ मनु अग्रवाल बताते हैं, "एक रिसर्च के मुताबिक स्कूल जाने वाले बच्चों में डिप्रेशन का मामला लगातार ज्यादा देखा जा रहा है। और यही वजह है कि बच्चों में सुसाइड की घटना पहले से बढ़ी है। बड़ी बात ये है कि बच्चों में डिप्रेशन के कारण बहुत छोटे-छोटे होते हैं।" वो आगे बताते हैं, "माता पिता की उम्मीदों पर पढ़ाई में खरे न उतरना। घर में दो बच्चों की तुलना से किसी एक बच्चे में डिप्रेशन आ जाना। मां-बाप के आपसी संबंध ठीक न रहने से बच्चे में डिप्रेशन आ जाना। ये कई मुख्य कारण है बच्चों के डिप्रेशन का।"


महिलाएं ज्यादा शिकार


डिप्रेशन भले ही शुरू में समझ नहीं आता हो पर ऐसा देखा गया है कि पुरुषों के मुकाबले महिलाओं को ये परेशानी ज्यादा और जल्दी घर करती है। मोटे अनुमान के अनुसार 10 पुरुषों में एक जबकि 10 महिलाओं में हर पांच को डिप्रेशन की आशंका रहती है। ऐसा माना जाता है कि पुरुष अपना डिप्रेशन स्वीकार करने में संकोच करते हैं जबकि महिलाएं दबाव और शोषण के चलते जल्दी डिप्रेशन में आ जाती हैं।


डिप्रेशन के कारण


मानसिक कमजोरी : मानसिक कमजोरी व्यक्ति को किसी भी कारण से हो सकती है जैसेकि अपमान, भय, आत्मविश्वास की कमी, ऑफिस के कठोर नियम, ईर्ष्या, प्यार का अभाव, कोई नुकसान, प्रियजन की मृत्यु आदि। मानसिक कमजोरी ही अवसाद या डिप्रेशन का पहला कारण होता है।


डिप्रेशन के लक्षण कारण और प्रकार


रोग : मानिसक कमजोरी के साथ साथ कुछ लोग अपनी शारीरिक कमजोरी और रोगों के कारण भी अधिक चिंतित रहने लगते है जो धीरे धीरे उनके संतुलन को खराब करने लगती है और ये परेशानी ही उनके अवसाद का कारण बन जाती है।


पारिवारिक समस्याएं : 

कुछ लोगों के घर में अनेक तरह की समस्या होती है जैसे गरीबी, अशांति, पारिवारिक झगड़ें, धन की कमी आदि। ऐसे लोग हर छोटी छोटी बात पर भी अधिक विचार करने लगते है और उसके पीछे के कारण को खोजने के चक्कर में खुद को एक भयंकर बीमारी का रोगी बना लेते है।


अकेलापन : 

      अकेलापन व्यक्ति के जीवन में बहुत गलत प्रभाव डालता है। आजकल युवा वर्ग में ये कारण अधिक पाया जाता है जब उनका प्रेमी या प्रेमिका उनके साथ धोखा कर देते है तो वो खुद को अकेला महसूस करने लगते है और डिप्रेशन का शिकार हो जाते है।


अनुवंशिक :

        डिप्रेशन अनुवंशिक भी है। अगर आपके माता पिता आपके जन्म से पूर्व अधिक चिंतित रहते थे तो आपको भी चिंतित रहने की आदत हो सकती है। खासतौर पर आपकी मां, अगर वो आपके गर्भ में होने के समय किसी बात से परेशान रहती थी तो आपका अवसाद से ग्रस्त होना लगभग शत प्रतिशत होता है। इसीलिए गर्भवती स्त्री को खुश रहने की सलाह दी जाती है।


बेरोजगारी : 

     डिप्रेशन के मुख्य कारणों में से एक है बेरोजगारी। ऐसे बहुत से छात्र है जो बड़ी कठिनाइयों और बेजोड़ मेहनत के कारण अपनी शिक्षा को प्राप्त करते है किन्तु उनको अच्छी नौकरी नहीं मिल पाती। शिक्षित होने के कारण ऐसे छात्र मानसिक रूप से मजबूत होते है और वे काफी प्रयास करते है किन्तु उनके अथक प्रयास के बाद भी उन्हें नौकरी नही मिलती तो अंत में वे डिप्रेशन का शिकार हो जाते है।


@ बचने के उपाय:@


# 1.अच्छे दोस्त बनाएं


अच्छे दोस्त आपको आवश्यक सहानुभूति प्रदान करते हैं और साथ ही साथ अवसाद के समय आपको सही निजी सलाह भी देते हैं।


# 2.संतुलित आहार लें


फल, सब्जी, मांस, फलियां, और कार्बोहाइड्रेट आदि का संतुलित आहार लेने से मन खुश रहता है। एक संतुलित आहार न केवल अच्छा शरीर बनता है बल्कि यह दुखी मन को भी अच्छा बना देता है।


# 3.बातचीत करें


अपनी समस्याओं के संबंध में बात करना भी तनाव दूर करने का उत्तम जरिया है। हममें से अधिकतर लोग खुद तक ही सीमित रहते हैं। अंदर ही अंदर घुटते रहने से और भी गंभीर समस्याएं पैदा हो सकती हैं।


# 4.अपने लिए समय निकालें


यह बेहद महत्वपूर्ण है कि आप व्यस्तता के बावजूद अपनी जरूरतों और देखभाल के लिए भी कुछ समय निकालें। आराम करने के लिए भी पर्याप्त समय बचा कर रखें।


# 5.लिखना शुरू करें


अपनी रोजाना की गतिविधियों और भावनाओं को लिखने से आत्मनिरीक्षण और विश्लेषण करने में आपको मदद मिलती है। एक जर्नल या डायरी रखें जिसमे रोजाना लिखें की आप जीवन के बारें में क्या महसूस करते हैं। यह आपके अवसाद को दूर करने में सहायक होगा।


# 6.मनोचिकित्सक से सलाह लें


अवसाद को दूर भगाने का सबसे मुख्य और आसान तरीका है कि आप मनोचिकित्सक की सलाह लें । मनोचिकित्सक की सलाह से आपको अवसाद की जड़ तक जाने और इसे दूर करने में मदद मिलेगी।

           कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि स्वस्थ रहिए, मस्त रहिए और तंदुरुस्त रहिए।


धन्यवाद।

(साभार संकलन)

मंगलवार, 14 सितंबर 2021

*क्रोध मनुष्य का अवगुण*

           *क्रोध मनुष्य का अवगुण*

                           


 मानव अन्य प्राणियों के अपेक्षा अधिक बुद्धिमान माना जाता है। ईश्वर द्वारा मनुष्य को सोचने समझने के लिए बुद्धि दी है, इतना ही नहीं स्मृति की विलक्षण शक्ति मनुष्य के पास है। इसी के आधार पर वह किसी भी  घटना को वह अधिक समय तक अपने दिमाग में रखता है। इन घटनाओं में  कुछ अच्छी घटनाएं होती है, कुछ बुरी घटनाएं भी इसमें रहती है। 


          मनुष्य का स्वाभाविक गुण-धर्म यह है कि वह सुखदायक घटनाओं को अपने स्मृति पटल पर अधिक समय तक रखता है। इसी  के साथ-साथ कुछ अप्रिय घटनाएं भी होती है । जो न चाहते हुए भी जीवन में आ जाती है।

    मनुष्य के अंदर कुछ स्थायी भाव होते हैं, तो कुछ संचारी भाव भी रहते हैं वो काम, क्रोध, मोह, माया, मत्सर आदि संचारी भाव हैं। इनका वास्तव्य मनुष्य के जीवन में अधिक समय तक नहीं रहता, परंतु इसका प्रभाव अधिक होता है। क्रोध से आदमी अपने आप को भूल जाता है। क्रोध में वह कुछ भी कर देता है।परंतु क्रोध की अग्नि ऐसी है जो मनुष्य को जिंदा जलाती है।

      क्रोध के कारण आदमी का सोचना भी बंद हो जाता है। इस के संदर्भ में इंगरसोल का कहना है कि " क्रोध मस्तिष्क के दीपक को बुझा देता है।" इसका आशय यह है कि क्रोध की तीव्रता इतनी अधिक होती है कि वह विचार करने की प्रक्रिया को भी बंद कर देती है।

         क्रोध कहां से शुरू होता है इस बारे में पाश्चात्य विचारक पाइथागोरस  ने लिखा है कि "क्रोध मूर्खता से शुरू होता है और पश्चाताप पर खत्म होता है।" यह बात बहुत ही तर्क संगत लगती है। क्रोध मूर्खता की निशानी है क्रोध बेवजह होता है। इसके कारण आदमी के शारीरिक और मानसिक शक्ति पर बुरा परिणाम पड़ता है।

       क्रोध से क्या-क्या होता है? किन दुष्परिणामों का सामना मनुष्य को करना पड़ता है? इस के संदर्भ में भगवान श्री कृष्ण के विचार बड़े ही प्रेरक  है । उनका कहना है कि " क्रोध से मूढता उत्पन्न होती है, मूढता से स्मृति का नाश हो जाता है, और बुद्धि के नष्ट हो जाने पर प्राणी समय नष्ट हो जाता है " 

     बुद्धि ही मनुष्य की अद्भुत शक्ति है। इसी के बल पर आदमी ने असाध्य को भी साध्य कर दिया है। यही बुद्धि समाप्त होगी तो मनुष्य और जानवर में कोई अंतर नहीं दिखाई देगा। इसीलिए तो क्रोधी व्यक्ति क्रोध में कुछ भी कर बैठता है। इसके परिणाम बड़े ही भयानक होते हैं।

   क्रोध के संदर्भ में युधिष्ठिर ने कहा है कि "बुद्धिमानों ने अपनी लौकिक उन्नति पारलौकिक के सुख और मुक्ति प्राप्त करने के लिए  क्रोध पर विजय प्राप्त की है।

    इन विचारों से हमें सीख मिलती है,कि अपना विकास, सुख, आनंद प्राप्त करने के लिए क्रोध को समाप्त करना आवश्यक है।

 क्रोध किस को अधिक आता है? इसके संदर्भ में रवींद्रनाथ ठाकुर जी का कहना है ," जो मन की पीड़ा को स्पष्ट रुप में कह नहीं सकता उसी को क्रोध आता है" इनके विचार बड़े ही मार्मिक लगते हैं।

         क्रोध जब नम्रता का रूप धारण कर लेता है तब क्या होता है? इसके संदर्भ में सुदर्शन जी ने लिखा है " जब क्रोध नम्रता का का रूप धारण कर लेता है तो अभिमान भी सिर झुका लेता है। नम्रता मनुष्य का अलंकार है। नम्रता में इतनी अधिक शक्ति होती है कि वह मनुष्य को ऊंचाई के शिखर पर पहुंचा देती है । 

   क्रोध  के संदर्भ में महात्मा गांधी जी के विचार है " क्रोध एक प्रचंड अग्नि है, जो मनुष्य इस अग्नि को वश में कर सकता है,वह उसको बुझा देगा। जो मनुष्य अग्नि को वश में नहीं कर सकता वह स्वयं अपने को जला देगा।"

     क्रोधाग्नि शरीर के अंदर होती है। बाहर लगी हुई आग को बुझाने में अन्य भी सहायक होंगे। परंतु आंतरिक अग्नि को बुझाने की क्षमता स्वयं मनुष्य के अंदर होती है। कब वह अपना परिचय करवाएगा इसको हम कह नहीं सकते।

    क्रोध का क्या परिणाम होता है? इसके बारे में हमने विचार किया है, परंतु इन विचारों की साक्ष हमें पुरानो एवं इतिहास में भी मिलते हैं। अनेक वर्षों की तपश्चर्या, साधना कुछ क्षण क्रोध करने से समाप्त हो चुकी है। क्रोध से लंका का नाश हुआ। क्रोध मानव की कमजोरी है। क्रोध मनुष्य का सही परीक्षक है।

           एक चीनी कहावत है जिसका आशय इस प्रकार है "जिस क्रोधाग्नि को तुम शत्रु के लिए प्रज्वलित करते हो, वह बहुधा तुम्हें ही अधिक जलाती है।"  इससे हमें यह सीख मिलती है कि भलाई का फल भला और बुराई का फल बुरा ही होता है। इसलिए हमेशा हमें अच्छे विचार करने चाहिए।

       क्रोध को किस प्रकार कम किया जा सकता है?  क्रोध को कम करने की औषधि कौन सी है?  इसके बारे में जेफरसन ने एक बहुगुणी औषधि बनाई है। उनका कहना है,कि जब क्रोध में हो तो दस बार सोच कर बोलिए, जब ज्यादा क्रोधित अवस्था में हो तो हजार बार सोचिए।" इनका आशय यही है कि मनुष्य को सोच समझकर बोलना चाहिए। कोई कार्य करने से पहले उसके परिणाम के बारे में सोचना चाहिए। तभी हम गलत विचार या कार्य नहीं करेंगे।         


       क्रोध ऐसा अवगुण है, जो कितना भी सोचने, समझने के बाद भी कहीं न कहीं दिखाई देता है। क्रोध यौवन  की तरह हमेशा युवा ही रहती है। बूढ़े मनुष्य को क्रोध आया तो वह जवान की तरह अपना रूप बना लेता है। क्रोध के कारण मनुष्य में शक्ति आ जाती है । क्रोध की जगह यत्र तत्र सर्वत्र है । यह बच्चे से लेकर बूढ़े तक सभी में दिखता है । हर मनुष्य इस क्रोध रूपी राक्षस से बचना चाहता है। क्रोध से अपनी आत्मरक्षा करना चाहता है । यदि आप आत्मरक्षा करना चाहते हैं तो अपने क्रोध को संभाल ले। ऐसा न करने पर क्रोध आपका नाश कर देगा।

    क्रोध के संदर्भ में वेदव्यास जी के विचार बड़े ही मार्मिक लगते हैं। वे कहते हैं ,"किसी के प्रति मन में क्रोध लिए रहने की अपेक्षा उसे तत्क्षण  प्रकट कर देना अधिक अच्छा है। जैसे क्षण भर में जल जाना देर तक सुलगन से अधिक अच्छा है ।" इनका यही कहना है कि क्रोध तो अपने अंदर जगह मत दो । किसी कारणवश आ भी जाता है तो उसे बाहर निकाल दो । 

   क्रोध के सिंहासन पर बैठते ही बुद्धि वहां से खिसक जाती है । खुद का किसी के साथ भी कोई संबंध नहीं रहता। क्रोध के कोई सगे संबंधी नहीं होते। वह किसी को भी  अपना रूप दिखाता है। 


    क्रोध के संदर्भ में महात्मा बुद्ध जी ने कहा है कि, "जो मानव मन में उठे हुए क्रोध को दौड़ते हुए रथ के समान शीघ्र रोक लेता है, उसी को मैं सारथी समझता हूँ। क्रोध के अनुसार चलने वाले को केवल लगाम रखने वाला मात्र कहा जा सकता है। 

       क्रोध के कुकर्मों का इतिहास बहुत बड़ा है। उन उदाहरणों को यहाँ पर देना मैंने उचित नहीं समझा। क्रोध से बचने के लिए हमेशा प्रयास कीजिए और अपने मानव जीवन का कल्याण करें।


               श्री डी.बी.देवकत्ते

        प्रशिक्षित स्नातक शिक्षक (हिंदी)

गुरुवार, 6 मई 2021

वाच्य

  • वाच्य

वाच्य का शाब्दिक अर्थ क्या है ?

वाच्य के मुख्य भेद कितने हैं ?

वाच्य के भेद कौन-कौन से हैं ?

निम्नलिखित वाक्यों का वाच्य बताइए।

बुद्ध ने विश्व को शांति का संदेश दिया।

एक व्यक्ति द्वारा समाज का सुधार संभव है।

वह चुपचाप नहीं पढ़ सकता।

निम्नलिखित वाक्यों को कर्मवाच्य में बदलिए।

मैंने खाना खाया।

तानसेन को संगीत सम्राट भी कहते हैं।

लड़कियों ने देश प्रेम का एक मार्मिक गीत सुनाया।

लेखक पुस्तक लिख रहा है।

आपने चिट्टियां लिखी होंगी।

उस घर में मजदूर काम कर रहे हैं।

परीक्षा की घोषणा हुई।

वह कभी भी कटु वचन नहीं बोलता।

राजेश पतंग नहीं उड़ा रहा है।

उन लड़कों ने हमें मूर्ख बना दिया।

मैं यह कविता नहीं पढ़ सकूंगा।

रमेश गीता पड़ता है।

6.निम्नलिखित वाक्यों को कर्तृवाच्य में बदलिए।

उनका दुख मुझसे नहीं देखा जाता।

तुम्हारे द्वारा परिवार के विकास के लिए क्या किया जा रहा है?

उन बच्चों द्वारा परिवार का विकास किया गया।

राजेश से गलत काम नहीं किया जाता।

दादी द्वारा कहानी सुनाई जा रही है।


मंगलवार, 6 अप्रैल 2021

कक्षा 7 वसंत पाठ 1

 कक्षा 7 वसंत

 पाठ 1 हम पंछी उन्मुक्त गगन के

प्रश्न 1

हर तरह की सुख सुविधाएँ पाकर भी पक्षी पिंजरे में बंद क्यों नहीं रहना चाहते ?

उत्तर-

हर प्रकार की सुख सुविधाएँ पाकर भी पक्षी पिंजरे में बंद नहीं रहना चाहते, क्योंकि उन्हें वहाँ उड़ने की आजादी नहीं है। वे तो खुले आसमान में ऊँची उड़ान भरना, नदी-झरनों का बहता जल पीना, कड़वी निबौरियाँ खाना, पेड़ की ऊँची डाली पर झूलना, कूदना, फुदकना अपनी पसंद के अनुसार अलग-अलग ऋतुओं में फलों के दाने चुगना और क्षितिज मिलन करना ही पसंद है। यही कारण है कि हर तरह की सुख-सुविधाओं को पाकर भी पक्षी पिंजरे में बंद नहीं रहना चा


प्रश्न 2.पक्षी उन्मुक्त रहकर अपनी कौन-कौन सी इच्छाएँ पूरी करना चाहते हैं?

उत्तर-

पक्षी उन्मुक्त रहकर अपनी इन इच्छाओं को पूरा करना चाहते हैं

(क) वे खुले आसमान में उड़ना चाहते हैं।

(ख) वे अपनी गति से उड़ान भरना चाहते हैं।

(ग) नदी-झरनों का बहता जल पीना चाहते हैं।

(घ) नीम के पेड़ की कड़वी निबौरियाँ खाना चाहते हैं।

(ङ) पेड़ की सब ऊँची फुनगी पर झूलना चाहते हैं।

वे आसमान में ऊँची उड़ान भरकर अनार के दानों रूपी तारों को चुगना चाहते हैं। क्षितिज मिलन करना चाहते हैं।


प्रश्न 3.

भाव स्पष्ट कीजिए-

या तो क्षितिज मिलन बन जाता या तनती साँसों की डोरी।

उत्तर

इस पंक्ति में कवि पक्षी के माध्यम से कहना चाहता है कि यदि मैं स्वतंत्र होता तो उस असीम क्षितिज से मेरी होड़ हो जाती। मैं इन छोटे-छोटे पंखों से उड़कर या तो उस क्षितिज से जाकर मिल जाता या फिर मेरा प्राणांत हो जाता।

कविता से आगे

प्रश्न 1.

कई लोग पक्षी पालते हैं

(क) पक्षियों को पालना उचित है अथवा नहीं? अपने विचार लिखिए।

(ख) क्या आपने या आपकी जानकारी में किसी ने कभी कोई पक्षी पाला है? उसकी देखरेख किस प्रकार की जाती होगी, लिखिए।

उत्तर-

(क) हमारे दृष्टिकोण से पक्षियों को पालना उचित नहीं है, इससे हम उनकी आजादी पर रोक लगा देते हैं। उनकी इच्छाओं, सपनों तथा अरमानों पर पाबंदी लग जाता है। अतः पक्षियों को पालना सही नहीं है। उन्हें प्रकृति में स्वच्छंद विचरण करने देना चाहिए। उन्हें वहीं प्रसन्नता मिलती है।

(ख) हमारे एक पड़ोसी ने तोता पाला था। उस पड़ोसी ने उसे मेले से खरीदकर लाया था। उसके परिवार के सभी सदस्य मन से उसकी देखरेख किया करते थे। प्रतिदिन उसके पिंजरे की सफ़ाई किया करते थे। एक कटोरी में पानी पीने के लिए तथा खाने के लिए चना दिया जाता था। इसके अलावे तोते को मौसमी फल तथा मिर्च भी खाने को दिया जाता था। मेरा पडोसी घंटों उस तोते से बातें किया करता था और उसे लेकर उसे घुमाने पार्क में जाया करता था। तोते ने घर के सभी सदस्यों के नाम रट लिए थे, लेकिन तोता खाना भारी मन से खाता था। जब मैं पड़ोसी के घर पिंजरे के पास जाता था तो वह हमारी ओर आशा भरी दृष्टि से देखता था।


प्रश्न 2.

पक्षियों को पिंजरे में बंद करने से केवल उनकी आज़ादी का हनन ही नहीं होता, अपितु पर्यावरण भी प्रभावित होता है। इस विषय पर दस पंक्तियों में अपने विचार लिखिए।

उत्तर

पक्षियों को पिंजरे में बंद करके उनकी आजादी का हनन होता ही है क्योंकि उनकी प्रकृति है ‘उड़ना। पिंजरे में बंद करके हम उन्हें पराधीन बना लेते हैं। जिससे उनकी आज़ादी तो समाप्त हो ही जाती है साथ ही पर्यावरण भी प्रभावित होता है क्योंकि पर्यावरण को संतुलित करने में भी पक्षियों का सहयोग रहता है। पक्षी आहार श्रृंखला को नियमित करते हैं। जैसे-घास को टिड्डा खाता है, टिड्डे को पक्षी खाते हैं और यदि पक्षी न हों तो टिड्डों की संख्या अत्यधिक हो जाएगी जो फसलों को नष्ट कर देंगे। यदि टिड्डे न हों तो घास इतनी बढ़ जाएगी कि मनुष्य परेशान हो जाएगा।



अनुमान और कल्पना

प्रश्न 1.

क्या आपको लगता है कि मानव की वर्तमान जीवन-शैली और शहरीकरण से जुड़ी योजनाएँ पक्षियों के लिए घातक हैं? पक्षियों से रहित वातावरण में अनेक समस्याएँ उत्पन्न हो सकती हैं। इन समस्याओं से बचने के लिए हमें क्या करना चाहिए? उक्त विषय पर वाद-विवाद प्रतियोगिता का आयोजन कीजिए।

उत्तर

यह कहना गलत नहीं कि मानव की वर्तमान जीवन-शैली और शहरीकरण से जुड़ी योजनाएँ पक्षियों के लिए घातक हैं क्योंकि शहरों में औद्योगीकरण के कारण विषैली गैसें और प्रदूषित जल पक्षियों के लिए हानिकारक होता है। दूसरी ओर अधिक-से-अधिक भवन निर्माण के कारण वनों व हरियाली वाले इलाकों को काटकर बड़े-बड़े भवन बना दिए जाते हैं, जिससे पक्षियों का आश्रय स्थल समाप्त हो जाता है। साथ ही वृक्षों से प्राप्त खाद्य पदार्थ, फल-फूल आदि उन्हें नहीं मिल पाते। ऐसा होने पर उन्हें बहुत मुश्किलों का सामना करना पड़ता है।


पक्षियों से रहित वातावरण में आहार श्रृंखला प्रभावित हो जाएगी। पर्यावरण संतुलित नहीं रहेगा। इसके लिए हमें अधिक-से-अधिक वृक्ष लगाने चाहिए व बाग-बगीचों का निर्माण करना चाहिए। फैक्टरियों को भी शहरों से दूर लगाकर धुएँ व प्रदूषित जल हेतु उचित प्रबंध करने चाहिए। (नोट-इन्हीं विचारों के आधार में वाद-विवाद कीजिए)।



 

प्रश्न 2.

यदि आपके घर के किसी स्थान पर किसी पक्षी ने अपना आवास बनाया है और किसी कारणवश आपको अपना घर बदलना पड़ रहा है तो आप उस पक्षी के लिए किस तरह के प्रबंध करना आवश्यक समझेंगे? लिखिए।

उत्तर-

यदि हमारे घर में किसी पक्षी ने अपना घोंसला बनाया हो और किसी कारणवश हमें घर बदलना पड़ रहा हो, तो हम प्रयास करेंगे कि जब तक घोंसलों में रखे अंडों से बच्चे न निकल जाएँ और पक्षी उन्हें उड़ना न सिखा ले तब तब घोसलों को न छेड़ा जाए। यदि फिर भी घर छोड़ना अनिवार्य हुआ तो उस घर में जाने वाले नए परिवार से मिलकर यह अनुरोध करेंगे कि वे घोसलों को यथावत रहने दें और न छेड़े तथा उनका ध्यान रखें।



भाषा की बात


प्रश्न 1.

स्वर्ण-श्रृंखला और लाल किरण-सी में रेखांकित शब्द गुणवाचक विशेषण हैं। कविता से हूँढ़कर इस प्रकार के तीन और उदाहरण लिखिए।

उत्तर-

(क) कनक-तिलियाँ,

(ख) कटुक-निबौरी,

(ग) तारक-अनार


प्रश्न 2.

‘भूखे-प्यासे’ में द्वंद्व समास है। इन दोनों शब्दों के बीच लगे चिह्न को सामासिक चिह्न (-) कहते हैं। इस चिह्न से ‘और’ का संकेत मिलता है, जैसे-भूखे-प्यासे = भूखे और प्यासे।

इस प्रकार के दस अन्य उदाहरण खोजकर लिखिए।

उत्तर-

दाल-रोटी – दाल और रोटी

अन्न-जल – अन्न और जल

सुबह-शाम – सुबह और शाम

पाप-पुण्य – पाप और पुण्य

राम-लक्ष्मण – राम और लक्ष्मण

सुख-दुख – सुख और दुख

तन-मन – तन और मन

दिन-रात – दिन और रात

दूध-दही – दूध और दही

कच्चा-पक्का – कच्चा और पक्का


अन्य पाठेतर है हल प्रश्न


बहुविकल्पी प्रश्नोत्तर

(क) ‘हम पंछी उन्मुक्त गगन के’ पाठ के रचयिता हैं

(i) भवानी प्रसाद मिश्र

(ii) सर्वेश्वर दयाल सक्सेना

(iii) शिवमंगल सिंह ‘सुमन’

(iv) महादेवी वर्मा


(ख) पक्षी कहाँ का जल पीना पसंद करते हैं?

(i) नल का जल

(ii) वर्षा का जल

(iii) नदी-झरनों का जल

(iv) पिंजरे में रखी कटोरी का जल



 

(ग) बंधन किसका है?

(i) स्वर्ण का

(ii) श्रृंखला का

(iii) स्वर्ण श्रृंखला का

(iv) मनुष्य का


(घ) लंबी उड़ान में क्या-क्या संभावनाएँ हो सकती थीं?

(i) क्षितिज की सीमा मिल जाती

(ii) साँसों की डोरी तन जाती

(iii) ये दोनों बातें हो सकती थीं

(iv) कुछ नहीं होता



 

(ङ) पक्षी क्यों व्यथित हैं?

(i) क्योंकि वे बंधन में हैं।

(ii) क्योंकि वे आसमान की ऊँचाइयाँ छूने में असमर्थ हैं।

(iii) क्योंकि वे अनार के दानों रूपी तारों को चुगने में असमर्थ हैं।

(iv) उपर्युक्त सभी


उत्तर-

(क) (iii)

(ख) (iii)

(ग) (iii)

(घ) (iii)

(ङ) (iv)


अतिलघु उत्तरीय प्रश्न


(क) इस कविता तथा कवि का नाम लिखिए।

उत्तर-

कविता का नाम- ‘हम पंछी उन्मुक्त गगन के

कवि का नाम- शिवमंगल सिंह ‘सुमन’


(ख) पक्षी कैसा जीवन जीना चाहते हैं?

उत्तर-

पक्षी एक स्वतंत्र जीवन जीना चाहते हैं।



 

(ग) पक्षी ऊँची उड़ान के लिए क्या-क्या बलिदान देते हैं?

उत्तर-

पक्षी ऊँची उड़ान के लिए अपना घोंसला, डाली का सहारा आदि सब कुछ न्योछावर करने को तैयार हैं। उनका मानना है। कि ईश्वर ने उन्हें सुंदर पंख दिए हैं इसलिए उनकी उड़ान में कोई बाधक न बनें।


(घ) अपनी किन इच्छाओं को पूरा करने के लिए पिंजरे से आजाद होने के लिए व्याकुल हैं।

उत्तर-

पक्षी नदी-झरनों का बहता जल पीने, तेज़ गति से उड़ान भरने नीले आसमान की सीमा तक उड़ने, पेड़ की फुनगी पर झूलने, कड़वी निबौरियाँ खाने और अनार रूपी दाने चुगने के लिए पिंजरे के बाहर निकलने के लिए व्याकुल होते हैं।

                                         *साभार प्राप्त।



शुक्रवार, 2 अप्रैल 2021

वह चिडिया जो

 वसंत भाग 1

पाठ 1.वह चिडिया जो

निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लिखिए

1.वह चिड़िया कैसी है?

2..चिड़िया को किस से प्यार है?

3. वह चिड़िया जो कविता के कवि कौन है?

4.चिड़िया के पंख कैसे हैं?

5.चिड़िया का स्वभाव कैसा है?

6.चिड़िया किसके  खातिर गाती है?

CLASS 8 HINDI MDP TERM -2

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