गुरुवार, 9 मार्च 2023

पठित गद्यांश पर प्रश्न

    पठित गद्यांश पर प्रश्न (कक्षा दसवीं)



निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर दिए गए प्रश्नों के उत्तर  उचित विकल्प को चुनकर लिखिए |                                                       5×1=5

बालगोबिन भगत की मौत उन्हीं के अनुरूप हुई। वह हर वर्ष गंगा स्नान करने जाते | स्नान पर उतनी आस्था नहीं रखते, जितना संत-समागम और लोक -दर्शन पर|  पैदल ही जाते | करीब  तीस कोस पर गंगा थी। साधु को संबल लेने का क्या हक? और, गृहस्थ किसी से भिक्षा क्यों माँगे? अतः घर से खाकर चलते, तो फिर घर पर ही लौटकर खाते। रास्ते भर खँजड़ी बजाते, गाते, जहाँ प्यास लगती, पानी पी लेते।चार-पाँच दिन आने-जाने में लगते; किंतु इस लंबे उपवास में भी वही मस्ती ! अब बुढ़ापा आ गया था किंतु टेक वही जवानी वाली। इस बार लौटे तो तबीयत  कुछ सुस्त थी। खाने-पीने के बाद भी तबीयत नहीं सुधरी, थोड़ा बुखार आने लगा | किन्तु नेम-व्रत तो छोड़नेवाले नहीं थे| स्नानध्यान खेतीबारी देखना । दिन-दिन छिजने लगे| लोगों ने नहाने-धोने से मना किया ,आराम करने की कहा किंतु हँसकर टाल देते रहे। उस दिन भी संध्या में गीत गाए, किंतु मालूम होता है, जैसे तागा टूट गया हो, माला का एक-एक दाना बिखरा हुआ | भोर में लोगों ने गीत नहीं सुना,जाकर देखा तो बालगोबिन भगत नहीं रहे सिर्फ उनका पंजर पड़ा है !

1] बालगोबिन भगत प्रतिवर्ष गंगा-स्नान करने क्यों जाते थे?

(क) गंगा स्नान का सौभाग्य प्राप्त करने (ख) सच्चे साधकों से मिलने की इच्छा से 

(ग) उनके घर की परम्परा निभाने के लिए  (घ) क्योंकि वे हमेशा से जाते रहे है 

2] बालगोबिन जी गंगा-यात्रा के दौरान उपवास क्यों रखते? उनका मानना था कि-

(क) साधु को संबल नहीं लेना चाहिए  (ख) गृहस्थ को  भिक्षा नहीं मांगनी चाहिए

(ग) केवल ‘क’ पर्याय सही  (घ) ‘क’ तथा ‘ख’ दोनों पर्याय सही 

3] बालगोबिन भगत  उपवास का पालन किस प्रकार करते?

(क) साबूदाना खिचड़ी खाकर  (ख) घर से खाकर चलते तो घर लौटकर ही खाते 

(ग) एक वक्त खाकर और पानी पीकर  (घ) इनमें से नहीं 

4] बालगोबिन भगत की तबीयत बिगड़ने का क्या कारण था?


(क) वृद्धावस्था में उपवास रखना   (ख) प्रतिवर्ष गंगा-स्नान जाना 

(ग) भजन गाना                 (घ) उनके बेटे की मृत्यु का दुःख  

5] बालगोबिन के गीतों में कैसा भाव व्यक्त होता था?



(क) प्रभुमिलन का    (ख) देशभक्ति का   (ग) वियोग का   (घ) इनमें से कोई नहीं


2.निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर दिए गए प्रश्नों के उत्तर उचित विकल्प को चुनकर लिखिए |                                                       5×1=5

ठाली बैठे, कल्पना करते रहने की पुरानी आदत है। नवाब साहब की असुविधा और संकोच  के कारण का अनुमान करने लगे। संभव है, नवाब साहब ने बिलकुल अकेले यात्रा कर सकने के अनुमान में किफ़ायत के विचार से सेकंड क्लास का टिकट खरीद लिया हो और अब गवारा न हो कि शहर का कोई सफ़ेदपोश उन्हें मँझले दर्जे में सफ़र करता देखे।...अकेले सफ़र का वक्त काटने के लिए ही खीरे खरीदे होंगे और अब किसी सफ़ेदपोश के सामने खीरा कैसे खाएँ? हम कनखियों से नवाब साहब की ओर देख रहे थे। नवाब साहब कुछ देर गाड़ी की खिड़की से बाहर देखकर स्थिति पर गौर करते रहे। 'ओह', नवाब साहब ने सहसा हमें संबोधन किया, 'आदाब-अर्ज़', जनाब, खीरे का शौक फ़रमाएँगे?

नवाब साहब का सहसा भाव-परिवर्तन अच्छा नहीं लगा। भाप लिया, आप शराफ़त का गुमान बनाए रखने के लिए हमें भी मामूली लोगों की हरकत में लथेड़ लेना चाहते हैं। जा दिया, 'शुक्रिया, किबला शौक फरमाएँ।'

1]लेखक ठाली बैठे  क्या अनुमान करने लगे?

(क) वे अपनी कहानी के बारे में सोच रहे थे|

(ख) नवाब साहब की असुविधा और संकोच के कारणों के बारे में सोच रहे थे| 

(ग) नवाब साहब के कपड़ों के बारे में सोच रहे थे।

(घ) वे सोच रहे थे कि नवाबी चली गई परन्तु आदतें नहीं गई|

2] नबाब साहब ने सकेंड क्लास का टिकट क्यों खरीदा होगा ?

(क)उन्हें लगा होगा की आज सेकंड क्लास में सफर करके देखा जाए |

(ख)उनके पास इतने पैसे नहीं होंगे कि वे फर्स्ट क्लास का टिकट ले सके

(ग)उन्होंने किफायत के विचार से सेकंड क्लास का  टिकट खरीदा होगा |

(घ)उनको फर्स्ट क्लास का टिकट नहीं मिल पाया होगा |

3] लेखक नवाब साहब की ओर कैसे देख रहे थे ?

(क)कनखियों से         (ख)गौर से

(ग)टेढ़ी नजर से         (घ)आश्चर्य से

4] लेखक ने यहाँ धन्यवाद के स्थान पर क्या शब्द प्रयोग किया है ?

(क)किबला (ख) आदाब अर्ज

(ग)शराफत    (घ) शुक्रिया

5] लेखक ने मामूली लोगों की हरकत किसे कहा है ?

(क) सेकंड क्लास में सफर करने को

(ख) इस प्रकार खीरा खाने को

(ग) खिड़की से बाहर झाँकने को

(घ) नवाबी रोब दिखाने को

बुधवार, 8 मार्च 2023

मेरा विद्यालय

 मेरा विद्यालय 

1 – मेरे स्कूल का नाम केन्द्रीय विद्यालय औरंगाबाद है।

2.मेरे स्कूल में अंग्रेजी माध्यम से पढाई किया जाता है।


3 – मेरे स्कूल में कक्षा पहली से लेकर 12वी तक की पढाई होती है।


4 – हमारा स्कूल शहर के सबसे अच्छे विद्यालयों में से विद्यालय है।

5. हमारे स्कूल में पढाई का समय 7 बजे से 12 बजे तक है।


6 – हमारे स्कूल की इमारते पक्की बनी हुई है, जिसमे हर कक्षा के लिए अलग अलग कमरे है।


7– स्कूल के बीचोबीच बहुत बड़ा मैदान है, जिसमे हम सभी बच्चे तरह तरह के खेल खेलते है।


8– विद्यालय में एक साथ प्रार्थना करने के लिए सभी बच्चो के लिए प्रार्थना स्थल बना हुआ है।

                                        

10 – हमारे स्कूल के सभी अध्यापक बहुत अच्छे है, जो की बहुत ही अच्छे से पढाई कराते है।

                     प्रस्तुतकर्ती - अनुजा



           




अनुशासन

 अनुशासन शिक्षा का पहला अध्याय है।

जीवन में अनुशासन का बहुत महत्व है। अनुशासन के बिना हम किसी भी क्षेत्र में सफल नहीं हो सकते। इसलिए हमें अनुशासन का पालन करना चाहिए।


पठित काव्यांश पर प्रश्न

 पठित काव्यांश पर प्रश्न (कक्षा दसवीं)


 निम्नलिखित काव्यांशों को ध्यानपूर्वक पढ़कर दिए गए प्रश्नों के उत्तर का सही विकल्प चुनकर लिखिए।


1.हमारे हरि हारिल की लकरी ।

मन क्रम वचन नंद-नंदन उर,यह दृढ़ करि चकरी।

जागते सोवत स्वप्न दिवस-निसि,कान्ह-कान्ह जक री।

सुनता जोग लागत है ऐसौ,ज्यौं करुंगी ककरी।

सु तौ ब्याधि हमकौ लै आए,देखी सुनी न करी।

यह तो 'सूर' तिनहिं लै सौंपो, जिनकी मन चकरी।।


1. गोपियों ने अपनी तुलना हारिल के पक्षी से क्यों कि है?


क. हारिल पक्षी सदैव लकड़ी लिए उड़ता है।

ख. गोपियों को हारिल पक्षी पसंद है?

ग. श्रीकृष्ण के प्रति अपने एकनिष्ठ प्रेम के कारण।

घ. श्रीकृष्ण के प्रति अपनी नाराज़गी के कारण।


2.'नंद नंदन' विशेषण किसके लिए प्रयुक्त हुआ है?


क. श्रीकृष्ण के लिए।


ख. गोपियों के लिए।


ग. उद्धव के लिए।


घ.नंद के लिए।


3. गोपियां किसे व्याधि कह रही है?


क. उद्धव की बातों को।

ख. उद्धव के योग ज्ञान को।

ग. श्रीकृष्ण के विरह को।

घ. श्रीकृष्ण के प्रेम को।


4.गोपियों को योग-साधना कैसी लगती है?


क. हारिल की लकड़ी की तरह।

ख.हारिल पक्षी के समान।

ग.जिसे कभी न देखा हो।

घ.कडवी ककडी के समान।


5.गोपियां योग का संदेश किनके लिए उपयुक्त समझती हैं?


क. जो श्रीकृष्ण से प्रेम नहीं करते।

ख.जिनका मन स्थिर नहीं है।

ग.जिनका मन स्थिर है।

घ.श्रीकृष्ण के लिए।


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2. विकल विकल,उन्मन थे उन्मन 

      विश्व के निदाघ के सकल जैन,

     आए अज्ञात दिशा से अनंत के घन!

      तप्त धरा,जल से फिर 

      शीतल कर दो-

      बादल ग्रंथों!

1.कवि बादल से क्या प्रार्थना करता है?

क. ग्रीष्म के ताप से लग्न लोगों को मुक्ति दिलाने की।

ख. धरती से गर्मी को कम करने की।

ग.गर्मी दूर करने की।

घ.उपर्युक्त सभी।


2.कवि ने बादलों को अनन्त के घन क्यों कहा है?

क.बादल अनन्त स्वरूप को धारण करने वाले ईश्वर की कृति हैं।

ख. बादलों का कोई अंत नहीं है।

ग.बादलों के आगमन के लिए कोई दिशा का निर्धारण नहीं है।

घ. इनमें से कोई नहीं।


3. 'जल' का प्रतीकात्मक भाव क्या है?


क. क्रांति एवं पौरुष भाव।

ख. नाद-सौंदर्य भाव।

ग. शांति एवं सुख का भाव।

घ.इनमें से कोई नहीं।

4. ग्रीष्म की बढ़ती हुई तपन के कारण जन-जीवन कैसा हो गया है?

क.जन-जीवन अस्त व्यस्त भरा।

ख. जन जीवन उन्माद भरा।

ग. जन जीवन उद्विग्न भरा।

घ. जन जीवन अनमना व व्याकुलता से भरा।


5.अज्ञात दिशा से किसका आगमन हुआ है?

क.वर्षा का ।

ख. वसंत का।

ग. बादलों का।

ग्रीष्म का।


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बादल, गरजो! -

घेर घेर घोर गगन, धाराधर ओ!

ललित ललित, काले घुँघराले,

बाल कल्पना के-से पाले,

विद्युत्-छबि उर में, कवि, नवजीवन वाले!

वज्र छिपा, नूतन कविता

     फिर भर दो -


1. कवि बादलों से क्या करने के लिए कहता है?


2.इस काव्यांश के कवि कौन है?


3. कवि ने बालों को किसकी उपमा दी है?


4. कवि बादलों से कैसे बरसने के लिए कहते हैं?


5. कविता का नाम क्या है?


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हिंदी विषय का प्रश्न पत्र

 हिंदी विषय का प्रश्न पत्र हल करते समय निम्नलिखित बातों का ध्यान रखना हैं।

1.सर्व प्रथम प्रश्न पत्र को अच्छी तरह से पढ़ना है।

2. दिए गए अपठित गद्यांश एवं काव्यांश पर आधारित प्रश्न एवं उनके विकल्प को ध्यान से पढ़िए। गद्यांश एवं काव्यांश  के आधार पर ही उचित विकल्प का चयन कर उसे पूर्ण लिखना हैं।

3. प्रश्नों का क्रमांक  सही तरह से लिखिए।

4. उत्तर पुस्तिका में काट छांट न करें।

5. पत्र लेखन, अनुच्छेद लेखन और संवाद लेखन आदि को अलग अलग पेज पर लिखिए।

6.लेखन में स्वच्छता एवं शुद्धता की ओर विशेष ध्यान देना हैं।

7. व्याकरण पर आधारित प्रश्नों के उत्तर सोच समझ कर लिखिए।

8.निर्धारित समय में ही प्रश्न पत्र हल करें।

9. पेपर लिखना पूर्ण होने पर फिर एक बार प्रश्न के क्रमांक जांच लिजिए।

10.सभी प्रश्नों को हल करना हैं।  

11. कोई भी प्रश्न अनुत्तरित नहीं छोड़ना हैं।

परीक्षा के लिए बहुत बहुत शुभकामनाएं।


         



महिला दिवस

 विश्व महिला दिवस की आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएं।

रविवार, 3 अक्टूबर 2021

मानसिक संतुलन : मनोदर्पण

       मनोदर्पण   :   मानसिक स्वास्थ्य सप्ताह 

                       (Mental Health week)

         (4/10/2021 से 10/10/2021)


मानसिक संतुलन : मनोदर्पण   

*परिभाषा

*कारण

*उपाय               


पूरी दुनिया में हज़ारों-लाखों लोग मानसिक रोग के शिकार होते हैं और इसका असर उनके साथ साथ उनके पूरे परिवार पर पड़ता है। देखा गया है कि हर चौथे इंसान को कभी-न-कभी मानसिक रोग होता है। दुनिया-भर में इस रोग की सबसे बड़ी वजह है, निराशा।


विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक, मानसिक रोग के शिकार बहुत-से लोग इलाज करवाने से कतराते हैं, क्योंकि उन्हें लगता है कि लोग उनके बारे में न जाने क्या सोचेंगे।


मानसिक रोग से जुड़ी एक संस्था की रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले साल अमेरीका में 8 से 15 की उम्र के जिन बच्चों को मानसिक रोग था, उनमें से करीब 50 प्रतिशत बच्चों का इलाज नहीं करवाया गया। और 15 से ऊपर की उम्र के करीब 60 प्रतिशत लोगों का इलाज नहीं हुआ।


मानसिक रोग क्या है


जब एक व्यक्ति ठीक से सोच नहीं पाता, उसका अपनी भावनाओं और व्यवहार पर काबू नहीं रहता, तो ऐसी हालत को मानसिक रोग कहते हैं। मानसिक रोगी आसानी से दूसरों को समझ नहीं पाता और उसे रोज़मर्रा के काम ठीक से करने में मुश्किल होती है।


इस बारे में लखनऊ के केजीएमयू के मनोचिकित्सा विभाग के विशेषज्ञ डॉ विवेक अग्रवाल बताते हैं, "मानसिक रोग के लक्षण, हर व्यक्ति में अलग-अलग हो सकते हैं। ये इस बात पर निर्भर करते हैं कि उसे कौन-सी मानसिक बीमारी है। मानसिक रोग किसी को भी हो सकता है, फिर चाहे वह आदमी हो या औरत, जवान हो या बुज़ुर्ग, पढ़ा-लिखा हो या अनपढ़, या चाहे वह किसी भी संस्कृति, जाति, धर्म, या तबके का हो।" अगर मानसिक रोगी अच्छी तरह अपना इलाज करवाए, तो वह ठीक हो सकता है। वह एक अच्छी और खुशहाल ज़िंदगी जी सकता है। लेकिन ज्यादातर केस में लोग काउंसलिंग करवाने से डरते हैं कि लोग उन्हें पागल समझेंगे और समस्या बढ़ जाती है। "


मानिसक रोग कई प्रकार के होते हैं, तनाव, डिप्रेशन, चिड़चिड़ापन, गुस्सा ये सभी इसी के अंतर्गत आते हैं।


तनाव


तेज़ी से बदलते माहौल में हमारे शरीर और मन पर जो असर पड़ता है, उसे तनाव कहते है। तनाव दो तरह का होता है। पहला – अच्छा तनाव और दूसरा – बुरा तनाव। जहां अच्छे तनाव की वजह से आप अपनी नौकरी में प्रमोशन पाते है, वहीं बुरे तनाव में आप किसी से गुस्से में बहस कर लेते है।


परिवार, पैसा, काम और स्कूल - ये तनाव के सामान्य कारण है।


  • तनाव के लक्षण


1.सिरदर्द व पीठदर्द

2.नींद न आना

3.गुस्सा और हताश होना

4.किसी एक चीज़ पर ध्यान 

    न लगा पाना

5.रोना

6.दूसरों को नज़रअंदाज़ करना


  • कैसे निपटें :


नियमित रूप से 20 से 30 मिनट शारीरिक व्यायाम (चलना, दौड़ना या उठना बैठना) करें। इससे आपके दिमाग को सोचने का वक्त मिलेगा। मेडिटेशन कीजिए (ध्यान लगाइए) राहत भरा संगीत सुनिए। 10-20 मिनट तक आंखें बंद करके शांति का अनुभव कीजिए। गहरी सांस लीजिए। दिमाग को शांत करें, और तनाव भरी बातें दिमाग से निकाल दें। अख़बार पढ़िए या किसी से बात कीजिए। अपनी भावनाओं को कागज़ पर लिखने से, या किसी से बात करने पर आप ये जान पाएंगे कि आपके तनाव के कारण क्या है।


छोड़ दें ये बुरी आदतें


देर तक सोना तनाव की शुरुआत आपकी सुबह से ही हो सकती है अगर आप रोज देर से सोकर उठते हैं। डॉक्टर भी मानते हैं कि देर से उठने वाले लोगों का मेटाबॉलिज्म ठीक नहीं रहता है जिससे उन्हें थकान, तनाव और उदासीनता अधिक सताती है। शोधों में भी यह माना गया है कि देर से उठने वाले लोग अक्सर सुबह का नाश्ता छोड़ते हैं जिससे उनका बॉडी साइकिल गड़बड़ होता है और वे जल्द तनावग्रस्त होते हैं। घंटों टीवी देखना आपको तनाव और अवसाद की स्थिति तक पहुंचाने के लिए काफी है। बजाय घंटों तक टीवी देखने के आप अपना समय परिवार के साथ बिताएंगे या सैर करेंगे तो तनाव से कोसों दूर रहेंगे। धूम्रपान आपका तनाव बढ़ाती है। धूम्रपान से धड़कन तेज हो जाती है जिससे तनाव बढ़ता है।


डिप्रेशन


एक ऐसी बीमारी है जिसके मरीज आपके आस-पास सबसे ज्यादा नजर आते हैं। आज की तारीख में आम बीमारियों में से एक है डिप्रेशन। बच्चे, जवान और बूढ़े हर तबके के लोग इस बीमारी के शिकार हैं। कारण सबका अलग-अलग हो सकता है पर लक्षण लगभग एक जैसे ही हैं।


क्या है डिप्रेशन


दरअसल डिप्रेशन एक डिसऑर्डर है, जिसमें उदासी की भावना किसी इंसान को दो हफ्ते या इससे भी ज्यादा लंबे वक्त तक घेरे रहती है। इससे जिंदगी के प्रति दिलचस्पी कम हो जाती है। नकारात्मक भावनाएं हावी हो जाती हैं।


डिप्रेशन में किसी भी इंसान को अपना एनर्जी लेवल लगातार घटता महसूस होता है। उसकी रोजमर्रा की जिंदगी भी प्रभावित हुए बिना नहीं रहती।


डिप्रेशन के लक्षण


लगातार उदासी से घिरे रहना। बेचैनी महसूस करना।

 किसी न किसी वजह से मूड खराब रहना।

जिंदगी से कोई उम्मीद न होना। 

घोर निराशा।

अपराध बोध होना, 

हर टाइम जिंदगी को बोझ मानना और 

मनपसंद काम न कर पाने की लाचारी महसूस करना।

पसंदीदा कामों में रुचि न रहना।

नींद न आना। 

तड़के नींद खुल जाना या बहुत ज्यादा नींद आना।

भूख कम लगने से लगातार वजन गिरना।

 जरूरत से ज्यादा खाने से मोटापा।

मन में सुसाइड के ख्याल आना। खुदकुशी की कोशिश करना।


बच्चे भी डिप्रेशन का शिकार


लखनऊ की मनोचिकित्सक डॉ मनु अग्रवाल बताते हैं, "एक रिसर्च के मुताबिक स्कूल जाने वाले बच्चों में डिप्रेशन का मामला लगातार ज्यादा देखा जा रहा है। और यही वजह है कि बच्चों में सुसाइड की घटना पहले से बढ़ी है। बड़ी बात ये है कि बच्चों में डिप्रेशन के कारण बहुत छोटे-छोटे होते हैं।" वो आगे बताते हैं, "माता पिता की उम्मीदों पर पढ़ाई में खरे न उतरना। घर में दो बच्चों की तुलना से किसी एक बच्चे में डिप्रेशन आ जाना। मां-बाप के आपसी संबंध ठीक न रहने से बच्चे में डिप्रेशन आ जाना। ये कई मुख्य कारण है बच्चों के डिप्रेशन का।"


महिलाएं ज्यादा शिकार


डिप्रेशन भले ही शुरू में समझ नहीं आता हो पर ऐसा देखा गया है कि पुरुषों के मुकाबले महिलाओं को ये परेशानी ज्यादा और जल्दी घर करती है। मोटे अनुमान के अनुसार 10 पुरुषों में एक जबकि 10 महिलाओं में हर पांच को डिप्रेशन की आशंका रहती है। ऐसा माना जाता है कि पुरुष अपना डिप्रेशन स्वीकार करने में संकोच करते हैं जबकि महिलाएं दबाव और शोषण के चलते जल्दी डिप्रेशन में आ जाती हैं।


डिप्रेशन के कारण


मानसिक कमजोरी : मानसिक कमजोरी व्यक्ति को किसी भी कारण से हो सकती है जैसेकि अपमान, भय, आत्मविश्वास की कमी, ऑफिस के कठोर नियम, ईर्ष्या, प्यार का अभाव, कोई नुकसान, प्रियजन की मृत्यु आदि। मानसिक कमजोरी ही अवसाद या डिप्रेशन का पहला कारण होता है।


डिप्रेशन के लक्षण कारण और प्रकार


रोग : मानिसक कमजोरी के साथ साथ कुछ लोग अपनी शारीरिक कमजोरी और रोगों के कारण भी अधिक चिंतित रहने लगते है जो धीरे धीरे उनके संतुलन को खराब करने लगती है और ये परेशानी ही उनके अवसाद का कारण बन जाती है।


पारिवारिक समस्याएं : 

कुछ लोगों के घर में अनेक तरह की समस्या होती है जैसे गरीबी, अशांति, पारिवारिक झगड़ें, धन की कमी आदि। ऐसे लोग हर छोटी छोटी बात पर भी अधिक विचार करने लगते है और उसके पीछे के कारण को खोजने के चक्कर में खुद को एक भयंकर बीमारी का रोगी बना लेते है।


अकेलापन : 

      अकेलापन व्यक्ति के जीवन में बहुत गलत प्रभाव डालता है। आजकल युवा वर्ग में ये कारण अधिक पाया जाता है जब उनका प्रेमी या प्रेमिका उनके साथ धोखा कर देते है तो वो खुद को अकेला महसूस करने लगते है और डिप्रेशन का शिकार हो जाते है।


अनुवंशिक :

        डिप्रेशन अनुवंशिक भी है। अगर आपके माता पिता आपके जन्म से पूर्व अधिक चिंतित रहते थे तो आपको भी चिंतित रहने की आदत हो सकती है। खासतौर पर आपकी मां, अगर वो आपके गर्भ में होने के समय किसी बात से परेशान रहती थी तो आपका अवसाद से ग्रस्त होना लगभग शत प्रतिशत होता है। इसीलिए गर्भवती स्त्री को खुश रहने की सलाह दी जाती है।


बेरोजगारी : 

     डिप्रेशन के मुख्य कारणों में से एक है बेरोजगारी। ऐसे बहुत से छात्र है जो बड़ी कठिनाइयों और बेजोड़ मेहनत के कारण अपनी शिक्षा को प्राप्त करते है किन्तु उनको अच्छी नौकरी नहीं मिल पाती। शिक्षित होने के कारण ऐसे छात्र मानसिक रूप से मजबूत होते है और वे काफी प्रयास करते है किन्तु उनके अथक प्रयास के बाद भी उन्हें नौकरी नही मिलती तो अंत में वे डिप्रेशन का शिकार हो जाते है।


@ बचने के उपाय:@


# 1.अच्छे दोस्त बनाएं


अच्छे दोस्त आपको आवश्यक सहानुभूति प्रदान करते हैं और साथ ही साथ अवसाद के समय आपको सही निजी सलाह भी देते हैं।


# 2.संतुलित आहार लें


फल, सब्जी, मांस, फलियां, और कार्बोहाइड्रेट आदि का संतुलित आहार लेने से मन खुश रहता है। एक संतुलित आहार न केवल अच्छा शरीर बनता है बल्कि यह दुखी मन को भी अच्छा बना देता है।


# 3.बातचीत करें


अपनी समस्याओं के संबंध में बात करना भी तनाव दूर करने का उत्तम जरिया है। हममें से अधिकतर लोग खुद तक ही सीमित रहते हैं। अंदर ही अंदर घुटते रहने से और भी गंभीर समस्याएं पैदा हो सकती हैं।


# 4.अपने लिए समय निकालें


यह बेहद महत्वपूर्ण है कि आप व्यस्तता के बावजूद अपनी जरूरतों और देखभाल के लिए भी कुछ समय निकालें। आराम करने के लिए भी पर्याप्त समय बचा कर रखें।


# 5.लिखना शुरू करें


अपनी रोजाना की गतिविधियों और भावनाओं को लिखने से आत्मनिरीक्षण और विश्लेषण करने में आपको मदद मिलती है। एक जर्नल या डायरी रखें जिसमे रोजाना लिखें की आप जीवन के बारें में क्या महसूस करते हैं। यह आपके अवसाद को दूर करने में सहायक होगा।


# 6.मनोचिकित्सक से सलाह लें


अवसाद को दूर भगाने का सबसे मुख्य और आसान तरीका है कि आप मनोचिकित्सक की सलाह लें । मनोचिकित्सक की सलाह से आपको अवसाद की जड़ तक जाने और इसे दूर करने में मदद मिलेगी।

           कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि स्वस्थ रहिए, मस्त रहिए और तंदुरुस्त रहिए।


धन्यवाद।

(साभार संकलन)

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